रांची : झारखंड सरकार ने शहरी क्षेत्रों में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने और नगर निकायों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से झारखंड नगरीय पर्यटक कर नियमावली, 2025 लागू कर दी है। इस संबंध में राज्यपाल के आदेश से नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव सुनील कुमार के हस्ताक्षर से सोमवार को अधिसूचना जारी कर दी गई है। कैबिनेट से इसकी पहले ही मंजूरी ले ली गई है। नई व्यवस्था के तहत नगरपालिका क्षेत्र में स्थित 3000 वर्ग फीट से अधिक क्षेत्रफल वाले होटल अब पर्यटकों से ठहराव के दौरान नगरीय पर्यटक कर वसूलेंगे।
यह कर कुल चालान मूल्य पर लगाया जाएगा, जिसमें जीएसटी और अन्य लागू स्थानीय कर शामिल नहीं होंगे। इसमें कमरे का शुल्क और प्रवास के दौरान प्राप्त की गई कोई भी अतिरिक्त सेवाएं या सुविधाएं शामिल हैं। यह कर होटल मालिक द्वारा बिलिंग के समय वसूला जायेगा। ऐसे में होटलों में ठहरना अब महंगा हो जाएगा। नगर विकास विभाग ने इसके लिए भारतीय व विदेशी पर्यटकों के लिए अलग-अलग दर तय की है। भारतीय पर्यटकों पर जीएसटी श्रेणी के अंतर्गत नहीं आने वाले होटल पर कुल चालान मूल्य दो प्रतिशत के आधार पर 2 से 5 प्रतिशत तक कर लगेगा।
जीएसटी के दायरे से बाहर आने वाले होटलों में 2 प्रतिशत, 18 प्रतिशत से कम जीएसटी वाले होटलों में 2.5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत या उससे अधिक जीएसटी वाले होटलों में कुल चालान मूल्य का 5 प्रतिशत नागरिक पर्यटक कर लिया जाएगा। विदेशी पर्यटकों के लिए यह दर जीएसटी के अंतर्गत नहीं आने वाले होटल में कुल चालान मूल्य पर 4 प्रतिशत व 18 प्रतिशत से कम जीएसटी वाले होटल पर कुल चालान मूल्य पर 5 प्रतिशत व 18 प्रतिशत से अधिक जीएसटी वाले होटल में कुल चालान मूल्य पर 10 प्रतिशत नागरिक पर्यटक कर लिया जायेगा।
यह कर निश्चित समय-सीमा के अंदर नगरपालिका में जमा करना होगा। यह नियम राज्य की सभी नगरपालिका सीमाओं में लागू होगा, जबकि पंचायत और कैंटोनमेंट क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है। सरकार ने मौजूदा होटल संचालकों को अधिसूचना जारी होने की तिथि से दो महीने के भीतर पंजीकरण कराने का निर्देश दिया है, जबकि नए होटल को संचालन शुरू करने से पहले सात दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
पंजीकरण के बाद होटल को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी, जिसके माध्यम से विभागीय पोर्टल पर लॉगिन कर कर जमा करना होगा। होटल संचालकों को प्रत्येक वित्तीय तिमाही समाप्त होने के 15 दिनों के भीतर यानी 15 जुलाई, 15 अक्टूबर, 15 जनवरी और 15 अप्रैल तक कर राशि संबंधित नगरपालिका को जमा करनी होगी तथा तिमाही रिटर्न भी दाखिल करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर मूल्यांकन अधिकारी नोटिस जारी कर कार्रवाई कर सकेंगे।

