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CJI ने मोदी के उनके आवास जाने को लेकर छिड़ी बहस पर कहा- अनावश्यक, अनुचित और अतार्किक

सीजेआई ने कहा, कि 'कोई भी जज, कम से कम मुख्य न्यायाधीश की स्वतंत्रता पर किसी भी तरह के खतरे (वास्तविक या कथित) को दूर से भी न्योता नहीं दे सकता।'

by Reeta Rai Sagar
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सेंट्रल डेस्क : चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई चंद्रचूड़ ने महीनों पहले गणपति पूजा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उनके आवास पर जाने को लेकर हुए विवाद को खारिज किया है। चंद्रचूड़ ने कहा कि वे भारत के लोकतांत्रिक प्रणाली के अंतर्गत अपने कर्तव्यों को जानते हैं।

एक इंटरव्यू के दौरान सीजेआई ने कहा, कि ‘कोई भी जज, कम से कम मुख्य न्यायाधीश की स्वतंत्रता पर किसी भी तरह के खतरे (वास्तविक या कथित) को दूर से भी न्योता नहीं दे सकता।’

न्यायिक मामलों पर चर्चा नहीं होती

मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने प्रधानमंत्री मोदी के आवास पर जाने को लेकर हुए विवाद को ‘अनावश्यक, अनुचित और अतार्किक’ करार दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों जैसे राजनीतिक कार्यकारी सामाजिक अवसरों पर न्यायाधीशों के घरों का दौरा कर सकते हैं और इस बात की पूरी मर्यादा होती है कि एक स्वतंत्र न्यायपालिका की भावना न्यायाधीशों के बीच इतनी गहरी है कि न्यायिक मामलों पर कभी चर्चा नहीं की जाती है।

Unnecessary, unfair and illogical : डी वाई चंद्रचूड़

गौरतलब है कि सितंबर में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के आवास पर गणपति पूजा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने विजिट किया था, जिस पर काफी विवाद हुआ था। अब चंद्रचूड़ ने पीएम के उनके आवास पर जाने को लेकर उठे विवाद को अनावश्यक, अनुचित और अतार्किक करार दिया है।

एक परंपरा है, जो मुझे इलाहाबाद में पता चला

उन्होंने एक परंपरा का जिक्र करते हुए कहा, जिसके बारे में उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभालने के बाद पता चला। इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद सीएम से मुलाकात की थी, जिसमें न्यायपालिका के सामने आने वाले बुनियादी ढांचे के मुद्दों पर चर्चा की गई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने बताया कि ‘सीएम की दूसरी मीटिंग हमेशा सीजे के आवास पर ही होती है।

आयोजनों, शादियों और त्योहारों में जाना आम बात

राजनीतिक अधिकारियों के साथ सामाजिक समारोहों के दौरान ज्यूडिशियरी मामलों पर चर्चा करने के महत्व पर जोर देते हुए, सीजेआई ने साझा किया कि त्योहारों, बच्चों के विवाह या उत्सव आदि जैसे सामाजिक अवसरों पर प्रधान न्यायाधीश और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों के आवासों पर जाना प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के लिए बेहद आम बात है।

गणपति पूजा का वीडियो और तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद से ही यह इस कंट्रोवर्सी ने जोर पकड़ी थी। इस विजिट के बाद से ही कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्ति के बंटवारे को लेकर बहस छिड़ गई थी। कई सीनियर एडवोकेट ने इस संबंध में चिंता व्यक्त की थी।

सीनियर लॉयर और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने बैठक की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, :भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण से समझौता किया है। सीजेआई की स्वतंत्रता पर सभी विश्वास खो चुके हैं’।

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