रामगढ़ : प्रशासन ने सीएनटी जमीन पर खतियानी रैयतों को कब्जा दिलाकर भू-वापसी करा दी है। रैयतों को छह साल बाद जमीन पर कब्जा मिल सका है। छोटानागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम के तहत संरक्षित भूमि के अवैध हस्तांतरण के मामले में प्रशासन ने महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। खतियानी रैयतों के वंशजों को अंचल अधिकारी रमेश रविदास ने पुलिस बल की मौजूदगी में भू-वापसी की प्रक्रिया बुधवार को पूरी कराई। भूमि का दखल-दिहानी कराई गई।
निरंजन करमाली और उनके उत्तराधिकारियों ने वर्ष 2018 में भू-वापसी के लिए वाद संख्या 27 एलआरडीसी न्यायालय में दायर किया था। मामले की सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद एलआरडीसी न्यायालय ने खतियानी रैयतों के वंशजों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भूमि पर पुनः कब्जा दिलाने का आदेश जारी किया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सीएनटी खाते की जमीन का हस्तांतरण कानूनी रूप से प्रतिबंधित है और इस प्रकार का कोई भी हस्तांतरण अवैध माना जाता है। इसी आधार पर निरंजन करमाली और उनके वंशजों के पक्ष में भू-वापसी का निर्णय लिया गया।
न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए अंचल अधिकारी रमेश रविदास को दंडाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने थाना संख्या 144, खाता संख्या 40, मौजा मरार के प्लॉट संख्या 1318, 1328 और 1397 की जमीन का सीमांकन कराया। इनमें क्रमशः 1.20 एकड़, 36 डिसमिल और 18 डिसमिल भूमि शामिल है।
प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के आधार पर भूमि की मापी कराई और कब्जाधारियों से जमीन खाली कराकर निरंजन करमाली के वंशजों को दखल-दिहानी दिलाई।
अधिकारियों ने बताया कि सीएनटी अधिनियम के तहत आदिवासी रैयतों की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में न्यायालय के आदेशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।

