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NEET UG 2026 :झारखंड हाई कोर्ट ने NTA से मांगी मूल ओएमआर शीट

झारखंड हाईकोर्ट ने NTA को निर्देश दिया है कि सीलबंद लिफाफे में मूल OMR पेश करें। नीट 2026 रिजल्ट विवाद को लेकर कोर्ट काफी सख्त है।

by Suhaib
High Court
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रांची : झारखंड हाई कोर्ट ने नीट यूजी-2026 परीक्षा में ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ी के मामले में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को अभ्यर्थी लक्ष्य सिंह की मूल ओएमआर शीट सीलबंद लिफाफे में अगले सप्ताह अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त तय की है।

याचिकाकर्ता का दावा है कि वेबसाइट पर अपलोड ओएमआर के अनुसार उसे 660 अंक मिल रहे थे, लेकिन परिणाम जारी होने के बाद अंक घटकर 116 कर दिए गए। एनटीए ने डिजिटल छेड़छाड़ का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया था। अदालत अब मूल ओएमआर शीट का परीक्षण कर मामले की सुनवाई करेगी।

मालिक व किरायेदारों की याचिका खारिज

झारखंड हाईकोर्ट ने पाकुड़ में तालाब की जमीन पर बने भवन के ध्वस्तीकरण की प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार करते हुए भवन मालिक धर्मेंद्र सिंह और आठ किरायेदारों की अलग-अलग याचिकाएं खारिज कर दीं। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने कहा कि पूर्व में पारित न्यायालय के अंतिम आदेश के विपरीत कोई अंतरिम राहत देना न्यायिक मर्यादा के विरुद्ध होगा।

भवन मालिक ने दावा किया था कि संबंधित भूमि रैयती है तथा तालाब उन्होंने स्वयं खुदवाया था। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2015 में दायर रिट याचिका में उन्हें पक्षकार नहीं बनाया गया था, जबकि उसी आदेश के आधार पर प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रहा है। अदालत ने कहा कि वर्ष 2015 के आदेश में संबंधित भूमि को तालाब के रूप में बहाल करने और विधि सम्मत प्रक्रिया के बिना उसका अन्य उपयोग नहीं करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था। ऐसे में ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने का आदेश देना पूर्व के अंतिम आदेश को निष्प्रभावी करने जैसा होगा।

किसान को अपील का अंतिम मौका

झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग के 15 वर्ष पुराने खनन वसूली मामले में किसान गेंदो महतो को अपील दायर करने का अंतिम अवसर दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता एक माह के भीतर अपील दायर करता है तो अपीलीय प्राधिकारी विलंब के आधार पर उसे खारिज नहीं करेगा और मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर करेगा।

याचिकाकर्ता ने वर्ष 2010 में प्रमाणपत्र पदाधिकारी (खनन) के वसूली आदेश और पुनर्विचार आवेदन खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि उसके पास वैधानिक अपील का प्रभावी उपाय उपलब्ध था, जिसका उसने उपयोग नहीं किया। रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट है कि उसे कारण बताओ नोटिस और कई अनुस्मारक भेजे गए थे, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि, उसे गरीब किसान और मामले के लंबे समय से लंबित होने को देखते हुए राहत दी गई।

चेक बाउंस मामले में समझौते के बाद सजा रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने 20 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में पक्षों के बीच समझौता होने के बाद दोषसिद्धि और सजा का आदेश रद्द कर दिया। जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत ने कहा कि मामला समझौतायोग्य है और शिकायतकर्ता को पूरी 20 लाख रुपये की राशि मिल चुकी है।

बीआईटी मोड़ निवासी बालकिशुन महतो को रांची की निचली अदालत ने वर्ष 2024 में चेक बाउंस के मामले में एक वर्ष के कारावास और 20 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दायर अपील भी खारिज हो गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट में दोनों पक्षों ने संयुक्त समझौता आवेदन दाखिल किया। शिकायतकर्ता ने भी अदालत को बताया कि उसे पूरी राशि प्राप्त हो चुकी है। इस पर हाईकोर्ट ने समझौते को स्वीकार करते हुए निचली अदालत और अपीलीय अदालत के दोषसिद्धि व सजा संबंधी आदेश निरस्त कर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका मंजूर कर ली।

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