
चक्रधरपुर : दक्षिण पूर्व रेलवे चक्रधरपुर रेल मंडल मुख्यालय में चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन परिसर में आरपीएफ की कथित दबंगई का मामला सामने आया है। एक टोटो चालक जगन्नाथ मुखी ने आरपीएफ के जवानों पर उसके साथ मारपीट करने, गाली-गलौज करने और टोटो को आरपीएफ पोस्ट के अंदर ले जाने का आरोप लगाया है। इस घटना को आसपास मौजूद लोगों ने भी देखा है।
चालक का कहना है कि इसके बाद उस पर 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन उसे यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि उसकी गलती क्या थी।टोटो चालक के अनुसार, वह एक बुजुर्ग मरीज को लेकर चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा था। बुजुर्ग की हालत ऐसी थी कि उन्हें चलने में काफी परेशानी हो रही थी। इसी वजह से वह उन्हें स्टेशन परिसर में क्रू लॉबी के पास उतारकर वापस जाने वाला था। इसी दौरान आरपीएफ पोस्ट की ओर से कुछ जवान बाहर आए और उसके साथ कथित तौर पर मारपीट शुरू कर दी।
चालक का आरोप है कि आरपीएफ जवानों ने उसे तीन-चार थप्पड़ मारे और मां-बहन को लेकर आपत्तिजनक गालियां दीं। इसके बाद उसके टोटो को आरपीएफ पोस्ट के अंदर ले जाया गया। चालक के मुताबिक, उस पर 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। उसका कहना है कि यदि स्टेशन परिसर में टोटो ले जाना नियम के विरुद्ध था, तो उसे नियम समझाकर कार्रवाई की जा सकती थी, लेकिन मारपीट और अभद्र भाषा का इस्तेमाल क्यों किया गया, यह समझ से परे है।
आम लोगों में नाराजगी
घटना की जानकारी सामने आने के बाद चक्रधरपुर के लोगों में आरपीएफ के रवैये को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाली सुरक्षा एजेंसी से आम नागरिकों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा होती है। खासकर गरीब टोटो चालकों और मरीजों को लेकर आने-जाने वाले लोगों के साथ कार्रवाई के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कुछ समय में रेलवे क्षेत्र में आम लोगों के साथ आरपीएफ के कथित सख्त रवैये की कई शिकायतें सामने आती रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति नियम का उल्लंघन करता है तो नियमानुसार चालान या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन मारपीट और गाली-गलौज किसी भी स्थिति में उचित नहीं मानी जा सकती।
पहले भी सामने आया था लाठीचार्ज का मामला
स्थानीय लोगों ने इससे पहले चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन के सेकंड एंट्री क्षेत्र में आम लोगों के साथ आरपीएफ द्वारा कथित तौर पर लाठी-डंडे से मारपीट किए जाने की घटना का भी हवाला दिया। लोगों का कहना है कि लगातार ऐसी शिकायतें सामने आने से आरपीएफ की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।वहीं, कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि रेलवे क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण और नियमों के पालन को लेकर आरपीएफ को अपनी प्राथमिकताओं पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि आम लोगों पर सख्ती दिखाने के बजाय रेलवे क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों पर भी उतनी ही गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए। इस घटना के सम्बन्ध में आरपीएफ के पक्ष के लिए चक्रधरपुर आरपीएफ थाना प्रभारी कमलेश सोरेन को फोन लगाया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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