
चाईबासा : राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। झारखंड में कुल 24 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इनमें पश्चिमी सिंहभूम के 14, लातेहार के 2 और छत्तीसगढ़ के 8 उग्रवादी शामिल हैं। रांची में आत्मसमर्पण की औपचारिकता पूरी होने के बाद पश्चिमी सिंहभूम के 14 नक्सलियों को मंगलवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चाईबासा लाया गया। यहां सदर अस्पताल में सभी का मेडिकल चेकअप कराया गया। स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें चाईबासा जेल में रखा गया है। वहीं लातेहार के 2 और छत्तीसगढ़ के 8 नक्सलियों को उनके गृह जिले व राज्य भेज दिया गया।
हजारीबाग ओपन जेल जाएंगे 14 नक्सली : एसपी
पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु ने बताया कि 14 नक्सलियों की चाईबासा में सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। इसके बाद इन्हें पुनर्वास के लिए हजारीबाग ओपन जेल भेजा जाएगा। वहां उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। एसपी ने कहा कि सरकार की नीति के तहत ये लोग अब मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। आत्मसमर्पण कर वे आम लोगों की तरह सम्मान के साथ जीवन बिता सकें, इसी उद्देश्य से यह पहल की गई है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि लगातार चलाए जा रहे अभियान और सरेंडर के कारण सारंडा क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां लगभग खत्म हो गई हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई से इलाके में अमन-चैन लौटा है। प्रशासन के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों को सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता, आवास और रोजगार के अवसर भी मुहैया कराए जाएंगे, ताकि वे समाज से फिर से जुड़ सकें। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सभी को पहले सदर अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया। जांच के बाद इन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस दौरान चक्रधरपुर एसडीपीओ डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी और एसीबी राहुल देव बड़ाईक सहित भारी संख्या में सुरक्षा बल मौजूद रहे।
एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा अब भी पुलिस की पहुंच से दूर
झारखंड के सारंडा और कोल्हान के घने जंगलों में एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर सुरक्षा बलों के लिए अब भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।कुछ महीने पहले हजारों जवानों की घेराबंदी और परिजनों की भावनात्मक अपील के बाद भी वह पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को चकमा देकर लगातार ठिकाना बदल रहा है।
3000 जवानों ने छाना जंगल
वर्तमान में झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन के करीब 3000 जवान सारंडा, टोंटो और गोइलकेरा के जंगल क्षेत्रों में संयुक्त सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। ड्रोन से निगरानी और घेराबंदी के बावजूद मिसिर बेसरा ने हाल ही में सारंडा से निकलकर कोल्हान या सीमावर्ती इलाकों में नया ठिकाना बना लिया है।
करीबी पकड़े गए, वह फरार
पुलिस ने उसके कई करीबी साथियों जैसे अजय महतो उर्फ टाइगर* को गिरफ्तार किया है। उसके दस्ते के कुछ सदस्यों ने आत्मसमर्पण भी किया है, लेकिन खुद मिसिर बेसरा अब तक गिरफ्त से बाहर है।
तीन दशक का अनुभव बनी बाधा
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह अभियान मुश्किल क्यों है, इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं।
जंगल की पूरी जानकारी
मिसिर बेसरा पिछले 26 सालों से झारखंड -बिहार -ओडिशा सीमा के जंगलों में सक्रिय है और इलाके के हर रास्ते से वाकिफ है।
सरेंडर करने से इनकार
पुलिस और परिवार द्वारा मुख्यधारा में लौटने की अपील के बावजूद उसने हथियार डालने से साफ मना कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि मिसिर बेसरा अब सारंडा छोड़ चुका है, जिससे पुलिस के लिए उसकी तलाश और कठिन हो गई है।वहीं अधिकारियों का मानना है कि जिस तरह सारंडा से नक्सली गतिविधियां कम हुई हैं, उससे आने वाले समय में यह इलाका फिर से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।
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