
रांची : नशे की लत युवाओं को बर्बाद कर रही है। एक ही सुई (इंजेक्शन) का बार-बार इस्तेमाल करने से एचआईवी (एड्स) और हेपेटाइटिस जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।
यह बातें रांची डालसा के डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा ने कहीं। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस और झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष सुजीत नारायण प्रसाद के निर्देश पर शुक्रवार को ‘अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध और अवैध तस्करी विरोधी दिवस’ के मौके पर रांची में जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। डालसा रांची की ओर से यह कार्यक्रम रिनपास, सीआईपी और प्रोबेशन होम समेत कई विधिक सहायता केंद्रों (लीगल ऐड क्लीनिक) में चलाया गया।
जागरूकता ही बचाव का माध्यम
कार्यक्रम में राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि हर साल 26 जून को यह खास दिन मनाने का मकसद लोगों को नशे के नुकसानों के प्रति सचेत करना है। उन्होंने इससे जुड़े कड़े कानूनों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि नशा करने से शरीर कमजोर हो जाता है, मानसिक तनाव बढ़ता है और इंसान डिप्रेशन (अवसाद) का शिकार हो जाता है।
अकेलेपन और दोस्तों के दबाव से बचें
कार्यक्रम में मौजूद डॉ. रूपा घोष ने बताया कि आज के समय में परिवारों के टूटने, घरेलू हिंसा और अपराध बढ़ने के पीछे नशा एक बहुत बड़ी वजह है। उन्होंने सलाह दी कि तनाव और अकेलेपन से दूर रहने के लिए योग, ध्यान और खेलकूद को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाएं।
वहीं डॉ. सजल ए. नाग ने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि अक्सर बच्चे दोस्तों के दबाव (पीयर प्रेशर) में आकर पहली बार नशा चखते हैं और फिर इसके आदी हो जाते हैं। इसलिए ऐसे दोस्तों से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए जो नशे को बढ़ावा देते हैं।
बच्चों ने पेंटिंग के जरिए दिया संदेश
मौके पर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों ने नशे के खिलाफ बेहद खूबसूरत और संदेश देने वाली पेंटिंग्स बनाईं, जिनकी एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. रूपा घोष, डॉ. सजल ए. नाग, पीएलवी भारती देवी, शारदा देवी और राजा वर्मा समेत सीआईपी और डालसा के कई कर्मियों ने अहम भूमिका निभाई।
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