Deoghar : देवघर जिले के करौं स्थित प्रखंड मुख्यालय के पास शनिवार को बाराटाड़ गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आसमान से एक पैराशूट जैसा गुब्बारा अचानक जमीन पर गिर गया। अज्ञात वस्तु के गिरने की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। कई लोगों ने इसे रहस्यमयी वस्तु समझा, जिससे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची। अंचलाधिकारी ऋषि राज, थाना प्रभारी दीपक किशोर भारती समेत अन्य अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर वस्तु की जांच की। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संयम बरतने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इस वस्तु से किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है और न ही इससे किसी व्यक्ति या संपत्ति को क्षति पहुंची है।
इस बीच गुब्बारे को ट्रैक करते हुए मौके पर पहुंचे विशिष्ट प्राध्यापक एवं इंडियन सेंटर ऑफ स्पेस फिजिक्स के निदेशक प्रोफेसर संदीप कुमार चक्रवर्ती ने पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह कोई संदिग्ध वस्तु नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए छोड़ा गया एक वेदर बैलून (मौसम गुब्बारा) है। यह गुब्बारा पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के शिवडी स्थित इंडियन सेंटर फॉर स्पेस फिजिक्स से छोड़ा गया था और वातावरणीय अध्ययन के दौरान उड़ान पूरी करने के बाद देवघर के बाराटाड़ गांव में आकर गिरा।
वायुमंडल का अध्ययन करने के लिए छोड़े जाते हैं बैलून
प्रोफेसर चक्रवर्ती ने बताया कि मानसून और वर्षा ऋतु से पहले वातावरण की विभिन्न परतों का अध्ययन करने के लिए ऐसे मौसम गुब्बारे नियमित रूप से छोड़े जाते हैं। ये गुब्बारे 30 से 40 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर पहुंचकर तापमान, वायुदाब, आर्द्रता और अन्य मौसम संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र करते हैं। इन आंकड़ों का उपयोग मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाने और अंतरिक्ष एवं वायुमंडलीय अनुसंधान के लिए किया जाता है।
प्रशासन ने लोगों से की अपील
गांव में रविवार को भी दिनभर इस बात को लेकर लोगों के बीच चर्चा होती रही। कई ग्रामीणों ने पहली बार इस प्रकार के वैज्ञानिक उपकरण को नजदीक से देखा। वहीं प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि भविष्य में यदि किसी क्षेत्र में कोई संदिग्ध या असामान्य वस्तु दिखाई दे तो इसकी जानकारी तत्काल पुलिस या प्रशासन को दें और बिना पुष्टि के किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें। प्रशासन के अनुसार यह पूरी तरह सुरक्षित वैज्ञानिक उपकरण था और इससे किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।

