
रांची: हजारीबाग कोषागार से सैलरी के नाम पर लगभग 15 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े के मामले में फंसे तीन आरोपियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। शनिवार को सीआईडी की विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी खुशबू सिंह, काजल कुमारी और धीरेंद्र सिंह की जमानत याचिकाएं नामंजूर कर दीं। इससे पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
इस बड़े वित्तीय घोटाले की कमान अब अपराध अनुसंधान विभाग के हाथों में है। शुरुआत में इस मामले को लेकर 8 अप्रैल 2026 को हजारीबाग के लोहसिंघना थाने में एक केस दर्ज कराया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी ने जांच अपने हाथों में ली और 24 अप्रैल को सीआईडी थाने में नया केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।
एसपी ऑफिस का मुख्य अकाउंटेंट है मास्टरमाइंड
सीआईडी की अब तक की कार्रवाई में कई रसूखदार और उनके मददगार सलाखों के पीछे जा चुके हैं। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड हजारीबाग एसपी ऑफिस का मुख्य अकाउंटेंट शंभू कुमार है। सीआईडी ने शंभू कुमार के साथ-साथ उसकी पत्नी काजल कुमारी, शंभू के मददगार रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह और उसकी पत्नी खुशबू सिंह को भी दबोचा है। इसके अलावा बिहार के गया जिले के रहने वाले धीरेंद्र सिंह को भी इस धांधली में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
जांच एजेंसी इस 15 करोड़ के घोटाले की हर परत को खंगालने में जुटी है। सीआईडी की टीम बैंक खातों के लेन-देन, सरकारी दस्तावेजों और फर्जीवाड़े के तरीकों की बारीकी से जांच कर रही है। एजेंसी का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कुछ और लोग भी हो सकते हैं, जिनकी पहचान करने के लिए लगातार छापेमारी और पूछताछ की जा रही है।
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