
चाईबासा : स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एके पंडा ने शनिवार को दुसरे दिन झारखंड समूह की खदानों और ओडिशा समूह की खदानों का दौरा कर खनन गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने खदानों में कार्यरत कर्मचारियों से मुलाकात की, उत्पादन व्यवस्था का जायजा लिया और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की। इस दौरे को सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने तथा आने वाले वर्षों में उत्पादन लक्ष्य हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. पंडा ने सेल की प्रमुख लौह अयस्क खदानों बरसुआ, टलडीह, कल्टा, बोलानी, गुवा, किरीबुरू और मेघाहातुबुरु आयरन ओर माइंस का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खदानों में चल रहे उत्पादन कार्य, मशीनरी की स्थिति, सुरक्षा उपायों और कर्मचारियों की कार्यशैली का गहन अवलोकन किया। कर्मचारियों के समर्पण और मेहनत की सराहना करते हुए सीएमडी ने कहा कि खनन कार्य जितना चुनौतीपूर्ण है, उतना ही जोखिमपूर्ण भी है, इसलिए सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
निरीक्षण के दौरान डॉ. पंडा ने स्पष्ट किया कि सेल की पहली प्राथमिकता उत्पादन नहीं, बल्कि श्रमिकों की सुरक्षा है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि खदानों में कार्य करते समय सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षित वातावरण में ही बेहतर उत्पादन संभव है। यदि श्रमिक सुरक्षित रहेंगे तो कंपनी का विकास भी सुनिश्चित होगा। दौरे के बाद किरीबुरू स्थित लर्निंग एंड डेवलपमेंट सेंटर में JGOM और OGOM के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई।
बैठक में खनन उत्पादन, परियोजना विस्तार, तकनीकी आधुनिकीकरण, डिजिटल परिवर्तन और परिचालन दक्षता पर विस्तार से चर्चा हुई। आने वाले वर्षों के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई और विभिन्न खदानों में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. पंडा ने कहा कि सेल ने वर्ष 2030-31 तक 35 मिलियन टन कच्चा इस्पात उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी को प्रतिवर्ष 100 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन सुनिश्चित करना होगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल उत्पादन का लक्ष्य नहीं, बल्कि देश की औद्योगिक आत्मनिर्भरता से जुड़ा मिशन है।सीएमडी ने कहा कि सेल की कैप्टिव माइंस कंपनी की रीढ़ हैं। लौह अयस्क की निरंतर उपलब्धता ही कंपनी की लागत नियंत्रण, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और दीर्घकालिक विकास की आधारशिला है। यदि खदानें मजबूत होंगी, तो इस्पात उत्पादन भी स्थिर और सशक्त रहेगा। डॉ. पंडा ने आधुनिक तकनीकों पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम खनन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे।
तकनीक का अधिकतम उपयोग कर उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने और दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने की दिशा में काम किया जाए। उन्होंने कहा कि सेल का लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि कंपनी के मुनाफे में भी उल्लेखनीय वृद्धि करना है। इसके लिए संसाधनों का बेहतर उपयोग, खनन दक्षता में सुधार और उत्पादन लागत में कमी जरूरी है।
खदानों से बेहतर प्रदर्शन ही कंपनी को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाएगा।डॉ. पंडा ने कहा कि सेल की विस्तार योजनाएं “आत्मनिर्भर भारत” अभियान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सुरक्षित, तकनीक-आधारित और पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ खनन मॉडल विकसित कर कंपनी देश की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाएगी।
इस दौरे से साफ है कि आने वाले समय में किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और ओडिशा की खदानें सेल की विकास यात्रा में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। कर्मचारियों ने भी सीएमडी के दौरे पर उत्साह जताया और कंपनी के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा से काम करने का भरोसा दिया। इस दौरान सेल के सभी अधिकारी उपस्थित थे।

