
चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा स्थित सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से सामने आए खून की कालाबाजारी के मामले को स्वास्थ्य विभाग ने काफी गंभीरता से लिया है। मामले की परतें खोलने और इसमें शामिल अन्य लोगों का सुराग लगाने के लिए सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी ने चार सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया है।
इस समिति में दो डॉक्टर, एक अस्पताल प्रबंधक (HM) और एक लिपिक शामिल हैं। यह टीम पश्चिमी सिंहभूम जिले के सभी नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर वहां मरीजों को चढ़ाए गए ब्लड का पूरा ब्योरा, बिलिंग और मरीजों का डेटा खंगालेगी। रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। जांच टीम चाईबासा, चक्रधरपुर, जगन्नाथपुर आदि जगहों पर जांच करेगी।
4,700 रुपये में बेचा गया था अस्पताल का ब्लड
यह पूरा मामला सोनुवा निवासी 37 वर्षीय बुधराम गोप की लिखित शिकायत के बाद उजागर हुआ। आरोप के अनुसार, सदर अस्पताल में भर्ती अपनी पत्नी के इलाज के दौरान जब उन्हें रक्त की सख्त जरूरत थी, तब 27 वर्षीय संजय सोलंकी नामक व्यक्ति ने मदद का झांसा दिया और ब्लड बैंक से खून दिलाने के नाम पर 4,700 रुपये ऐंठ लिए। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने कानून का दरवाजा खटखटाया। चाईबासा के सदर थाना की पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की और आरोपी संजय सोलंकी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
निजी अस्पतालों पर कड़ा शिकंजा, सीएस बोले- बख्शे नहीं जाएंगे दोषी
सदर अस्पताल से जुड़े इस गिरोह के तार निजी स्वास्थ्य संस्थानों तक फैले होने की आशंका जताई जा रही है। जांच समिति का गठन होते ही जिले के नर्सिंग होम संचालकों में हड़कंप मच गया है।
मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने कहा कि असहाय मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदर अस्पताल और ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता लाई जाएगी, ताकि हर जरूरतमंद को बिना किसी बिचौलिए या परेशानी के समय पर ब्लड मिल सके। स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति रक्त उपलब्ध कराने के एवज में रुपयों की मांग करे या दलाली की कोशिश करे, तो इसकी जानकारी तुरंत विभाग या पुलिस प्रशासन को दें।
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