जमुई, बिहार: बिहार के जमुई जिले के एक अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में नवजात बच्ची के शव को टॉयलेट में बहाने की कोशिश की गई। जब शव का सिर टॉयलेट सीट में फंस गया, तो मजबूरन सीट को तोड़कर शव बाहर निकाला गया। इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
कैसे हुआ खुलासा?
सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल के सफाईकर्मी जब टॉयलेट की सफाई करने पहुंचे, तो वहां टॉयलेट सीट में कुछ फंसा हुआ नजर आया। जब गौर से देखा गया, तो वह एक नवजात बच्ची का शव था, जो बुरी तरह से टॉयलेट सीट में अटका हुआ था। इसकी सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में टॉयलेट सीट को तोड़ा गया और शव को बाहर निकाला गया।
कौन है जिम्मेदार?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नवजात बच्ची को टॉयलेट में किसने और क्यों फेंका। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। पुलिस भी इस मामले में छानबीन कर रही है। प्राथमिक तौर पर यह आशंका जताई जा रही है कि यह किसी परिजनों की ओर से किया गया अमानवीय कृत्य हो सकता है, जो बच्ची को जन्म के तुरंत बाद ठिकाने लगाना चाहते थे।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब अस्पतालों में इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के एक अस्पताल में भी टॉयलेट के कमोड में नवजात शिशु का शव मिला था। इसी तरह, बिहार और झारखंड के कई अस्पतालों में नवजात बच्चों के शव मिलने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल परिसर में ऐसी घटना होना यह दर्शाता है कि वहां निगरानी की व्यवस्था लचर है। अगर अस्पताल प्रबंधन की ओर से उचित निगरानी होती, तो ऐसी घटना को रोका जा सकता था।
क्या कह रहे हैं अधिकारी?
इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान के लिए जांच की जा रही है। अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है, ताकि पता लगाया जा सके कि यह शर्मनाक हरकत किसने की।
जनता में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। वे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

