रांची । झारखंड में सामने आए कोषागार (ट्रेजरी) घोटाले को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने सभी विभागों, अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों और उपायुक्तों को कड़े निर्देश जारी करते हुए वित्तीय अनियमितताओं पर तत्काल रोक लगाने के लिए व्यापक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य के विभिन्न जिलों के कार्यालयों में वेतन मद से कोषागार के माध्यम से अवैध निकासी के गंभीर मामले सामने आए हैं। जांच में कर्मचारी विवरण में छेड़छाड़, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राशि निकासी और रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर करने जैसी अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
इन गड़बड़ियों को देखते हुए सरकार ने वित्तीय कार्यों से जुड़े कर्मियों पर सख्ती बढ़ा दी है। आदेश दिया गया है कि वरीय लेखा सहायक, लेखा सहायक, लेखा अधीक्षक, लेखापाल और विपत्र लिपिक जैसे पदों पर एक ही कार्यालय में तीन वर्ष से अधिक समय से पदस्थापित कर्मियों का अनिवार्य तबादला किया जाए।
इसके साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि संविदा या मानदेय पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को वित्तीय कार्यों से दूर रखा जाए, ताकि प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे और अनियमितताओं पर रोक लग सके। प्रारंभिक जांच में हजारीबाग और बोकारो जिलों में गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं, जबकि अन्य जिलों में भी जांच जारी है। इन दोनों जिलों में ही अब तक 19 करोड़ से अधिक की संदिग्ध निकासी की गई है। राज्य सरकार सभी 33 ट्रेज़री की जांच करा रही है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही गड़बड़ियां स्पष्ट होगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी द्वारा जांच की जा रही है। इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रही है।
30 मई तक मांगी अनुपालन रिपोर्ट
मुख्य सचिव ने सभी विभागों और उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि इन आदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें और की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 30 मई 2026 तक वित्त विभाग को अनिवार्य रूप से सौंपें

