Ranchi : झारखंड में 40 हजार से अधिक सहायक शिक्षकों के भविष्य को लेकर बुधवार को सरकार और शिक्षक प्रतिनिधियों के बीच अहम वार्ता हुई। इस बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि विभागीय स्तर पर आयोजित आकलन परीक्षा को TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के बराबर मान्यता देने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर लिया जाएगा।
यह बैठक झारखंड राज्य आकलन प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों और राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू तथा इरफान अंसारी के बीच हुई। इस दौरान स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह भी मौजूद रहे।
करीब एक घंटे तक चली इस वार्ता में तय हुआ कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के चार दिन के भीतर सरकार और प्रतिनिधिमंडल के बीच फिर से बैठक होगी। यदि फैसला शिक्षकों के पक्ष में आता है, तो आकलन परीक्षा को TET के समकक्ष मान्यता दी जाएगी। वहीं, अगर फैसला विपरीत होता है, तो साल में दो बार विभागीय स्तर पर TET परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिससे सहायक शिक्षकों को अवसर मिल सके।
सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष करने पर चर्चा
बैठक में मंत्रियों ने भरोसा दिलाया कि किसी भी सहायक शिक्षक की नौकरी नहीं जाएगी। साथ ही सहायक शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने और 967 बर्खास्त शिक्षकों की बहाली पर भी चर्चा हुई।
967 बरखास्त सहायक शिक्षकों के मामले की होगी समीक्षा
सचिव उमाशंकर सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को आदेश दिया था कि सभी नॉन-TET शिक्षकों को दो साल के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा। इस मामले में 28 अप्रैल को सुनवाई हुई है और फिलहाल फैसला सुरक्षित रखा गया है। निर्णय आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि 967 बर्खास्त सहायक शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर दस्तावेजों के साथ बुलाकर उनके मामले की समीक्षा की जाएगी।
इस बैठक में विभिन्न जिलों के शिक्षक प्रतिनिधि भी मौजूद रहे और अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखा।
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