धनबाद। धनबाद में आईआईटी (आइएसएम) ने विज्ञान को रोचक और आसान बनाने की दिशा में अनोखी पहल की है। विशेषज्ञों ने छात्राओं को साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथेमेटिक्स यानी एसटीईएम शिक्षा के महत्व से अवगत कराया। प्रयोगों के माध्यम से गैस निर्माण, वायुदाब, रासायनिक अभिक्रिया, परिवर्तन और घनत्व जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों को बेहद आसान तरीके से समझाया। छात्राओं ने काफी रुचि लेकर विज्ञान जटिलताओं को आसान भाषा में सरल तरीके समझा।
बीसीसीएल की सीएसआर पहल के तहत गर्ल्स हाई स्कूल रेलवे कॉलोनी भागा में शनिवार को आयोजित एसटीईएम आउटरीच कार्यक्रम में 160 छात्राओं को बैलून ब्लो-अप, लावा लैंप और एलीफेंट टूथपेस्ट जैसे दिलचस्प प्रयोगों के जरिए विज्ञान के सिद्धांत समझाए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य खनन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों और वंचित वर्ग के बच्चों में वैज्ञानिक सोच और तार्किक क्षमता विकसित करना था। कार्यक्रम आईआईटी (आइएसएम) धनबाद की ओर से आयोजित था।
कार्यक्रम का संचालन आईआईटी (आइएसएम) के डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर रश्मि सिंह और प्रोफेसर नीलाद्रि दास के नेतृत्व में किया गया।
बैलून ब्लो-अप, लावा लैंप और एलीफेंट टूथपेस्ट जैसे प्रयोगों ने उत्साह पैदा किया
छात्राओं ने खुद प्रयोगों में भाग लेकर विज्ञान को करीब से समझा। बैलून ब्लो-अप, लावा लैंप और एलीफेंट टूथपेस्ट जैसे प्रयोगों ने बच्चों में खासा उत्साह पैदा किया। प्रो. रश्मि सिंह ने कहा कि जब छात्र खुद प्रयोग करके सीखते हैं तो विज्ञान उनके लिए ज्यादा प्रभावी और रोचक बन जाता है। वहीं प्रो. नीलाद्रि दास ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और उन्हें भविष्य में एसटीईएम क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम में बीसीसीएल के निदेशक (एचआर) मुरली कृष्ण रमैय्या, महाप्रबंधक सीएसआर सुरेंद्र भूषण, कुमार मनोज और अभिजीत मित्रा भी मौजूद रहे। स्कूल के प्राचार्य प्रमोद सिंह चौधरी और शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने का काम करते हैं। आईआईटी (आइएसएम) इससे पहले भी नावागढ़, झरिया समेत कई क्षेत्रों के स्कूलों में एसटीईएम प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर चुका है
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