कोडरमा। शहर के युवा वैज्ञानिक का इनोवेशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धमाल मचा रहा है। यह न केवल कोडरमा बल्कि पूरे झारखंड एवं देश के लिए गौरव की बात है। कोडरमा झुमरीतिलैया के इस युवा वैज्ञानिक का नाम कुणाल अम्बष्ट है। उन्होंने ऐसा अभिनव उपकरण विकसित किया है, जो शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए नई उम्मीद बन सकता है।
यह तकनीक लकवाग्रस्त और गंभीर रूप से दिव्यांग लोगों के लिए वरदान साबित होगी। विदेशों में उपलब्ध ऐसे मेडिकल उपकरणों की कीमत करोड़ों रुपये तक होती है, जबकि उनका यह स्वदेशी नवाचार कम लागत में अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध कराएगा।
सामान्य को स्मार्ट व्हीलचेयर में बदल देगा काया-न्यूरोसिंक
कुणाल द्वारा तैयार “काया-न्यूरोसिंक” सामान्य व्हीलचेयर को स्मार्ट व्हीलचेयर में बदल देगा, जिसे इंसानी मस्तिष्क और आंखों की गतिविधियों से संचालित किया जा सकेगा। इनका नवाचार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रहा है।
राज्य को इस बात पर भी गर्व करना चाहिए कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित स्वदेशी उद्यमी एवं इनोवेटर्स महोत्सव में काया-न्यूरोसिंक को देशभर से चयनित 16 राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से नवाजा गया था।
सम्मेलन में इसका प्रदर्शन किया गया था। कुणाल अम्बष्ट के अनुसार काया-न्यूरोसिंक मानवीय इंटेलिजेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मिश्रण है, जिसमें एआई केवल सहायक की भूमिका निभाएगा।
यह उपकरण शरीर के बायो-पोटेंशियल सिग्नल्स, जैसे मस्तिष्क की तरंगों और आंखों की गतिविधियों को पढ़कर काम करता है। इसके माध्यम से व्यक्ति बिना बोले और बिना किसी शारीरिक स्पर्श के व्हीलचेयर, रोबोटिक आर्म और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नियंत्रित कर सकेगा।
इस प्रोजेक्ट की नींव नीति आयोग की कम्युनिटी इनोवेटर फेलोशिप के दौरान आईएसएम धनबाद के मार्गदर्शन में रखी गई थी। भारत सरकार युवा वैज्ञानिकों और नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए लगातार सहयोग कर रही है। इसी समर्थन के कारण उन्हें देश-विदेश के वैज्ञानिकों के साथ काम करने का अवसर मिला।
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