Jharkhand Bureaucracy : ‘जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग’। बचपन से अब तक कई बार यह दोहा पढ़ा-सुना। कई बार मायने-मतलब गुना। कभी लगा नहीं कि कोई प्रश्न बाकी रह गया। अचानक एक रात बिस्तर पर पड़े-पड़े याद आया। अरे! यह तो उलट गया। बिल्कुल बदल गया। हां वही, जिसके पूर्ण होने पर कभी कोई भ्रम नहीं रहा।
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वह मौजूदा वक्त में वैसा नहीं रहा, जैसा कहा गया था। कहने का मतलब सीधा-सीधा था। ‘चंदन’ पर विष का प्रभाव दिख गया। रात जैसे-तैसे गुजरी। सुबह-सवेरे जिज्ञासा लिए गुरु की चौखट पर पहुंच गया। गुरु कुछ झल्लाए बैठे थे। देखते ही बरस पड़े। बोले- और महोदय! लिखना-पढ़ना छोड़ दिए क्या? आपको भी सिस्टम का दबाव महसूस होने लगा? गुरु के अंदर की पीड़ा साफ झलक रही थी। शायद कोई जानी दुश्मन गुरु के वार से बच गया था। पिछले हफ्ते कोई कहानी हाथ लगी होगी। बताने वाला नहीं मिला। सो, छपी नहीं। लिहाजा, अब सामने देख सारी कसर उतार रहे थे। बहरहाल, गुरु का मूड ठीक करना जरूरी था। इसलिए अपनी तरफ से सफाई पेश की। कहा- गुरु ससुराल में कुछ घटित हो गया था, इसलिए नहीं आ सका।
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गुरु ने पहले ससुराल का ब्योरा लिया, फिर मुद्दे पर लौटे। पूछा- इतनी सुबह-सुबह पहुंच गए। कोई खास काम? बताया- हां गुरु, सोते-सोते एक दोहा दिमाग में फंस गया। सोचा कारण समझ लूं। गुरु ने व्याख्या शुरू की। कहा- जिस ‘चंदन’ पर विष का प्रभाव देख रहे हो, उनकी जड़ें काफी गहरी थीं। पेड़ में बारहमासा नमी बनी रहती थी। यही वजह थी कि कोयले की खदान पर लहलहाता वृक्ष सुरक्षित शिफ्ट हो गया।
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लौह अयस्क के भंडार में पर्याप्त उर्वरा मिट्टी मिली। सब कुछ तय गति से चल रहा था। सब कुछ कंट्रोल में था। अचानक एक मुद्दा आया। लोकल वोकल हो गया। बदले हालात में स्थानीय मिट्टी में रासायनिक प्रतिक्रिया हुई। ‘चंदन’ का पेड़ स्थानीय मौसम के साथ तारतम्य स्थापित नहीं कर सका। नमी घटने से वृक्ष पर विष का प्रभाव बढ़ गया। विकास प्रभावित होने लगा। जड़ें कमजोर हो गईं।
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यही वजह रही कि हवा का एक तेज झोंका आया और मजबूत पेड़ भरभराकर गिर गया। गुरु ने पूरे दोहे की बड़ी सरल व्याख्या कर दी। सारी शंका निर्मूल साबित हुई। कहने का अर्थ कि जो एक ‘चंदन’ के साथ हुआ, वह बस अपवाद था। शाश्वत सत्य नहीं। गुरु ने भावार्थ जोड़ा। नौकरशाही भी पेड़ की तरह है। जब तक जड़ को जमीन से नमी मिलती है, हरियाली बनी रहती है। जड़ कमजोर हुई नहीं कि सारी चमक गायब। बस इतनी सी बात सही वक्त पर समझ में आ जाए, फिर मुस्कान बदस्तूर कायम रहती है।
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