चाईबासा : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार नई दिल्ली एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार रांची के तत्वावधान में शनिवार को चाईबासा व्यवहार न्यायालय और चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालय में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान कुल 1,32,336 मामलों का निष्पादन हुआ और 37,52,00,542 रुपये का समायोजन किया गया।
आभासी माध्यम से हुआ उद्घाटन
राष्ट्रीय लोक अदालत का विधिवत उद्घाटन झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सह कार्यकारी अध्यक्ष झालसा, रांची न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने आभासी माध्यम से किया। चाईबासा सिविल कोर्ट और चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालय में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार मोहम्मद शाकिर के मार्गदर्शन में लोक अदालत आयोजित हुई।
12 न्यायपीठों ने की सुनवाई
चाईबासा न्यायालय में 9 और चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालय में 3 न्यायपीठों का गठन किया गया। प्री लिटिगेशन के 1,28,952 मामलों का निष्पादन हुआ। इनमें बैंक से संबंधित 119 वाद, ट्रैफिक चालान के 107, राजस्व के 1,27,812, बीएसएनएल के 27, स्थायी लोक अदालत के 876, उपभोक्ता न्यायालय से संबंधित 8 और वाणिज्यिक न्यायालय के 3 मामले शामिल थे।
लंबित 3384 मामलों का भी समाधान
विभिन्न न्यायालयों में लंबित 3384 मामलों का भी निपटारा किया गया। इनमें आपराधिक शमनीय के 2915 वाद, बिजली विभाग से संबंधित 67, राजस्व से संबंधित 358, भूमि अधिग्रहण से जुड़े 3, जेएमएमसी सेक्शन 54 के 15, मोटर दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल के 5, कुटुंब न्यायालय से संबंधित 8, एनआई एक्ट से संबंधित 9 तथा अन्य सिविल मामलों के 4 वाद शामिल थे।
न्यायिक अधिकारियों ने किया निष्पादन
प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय सूर्य भूषण ओझा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विनोद कुमार सिंह, तृतीय पीयूष श्रीवास्तव, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अक्षत श्रीवास्तव, सचिव डीएलएसए रवि चौधरी, सिविल जज एंजेलिना नीलम मड़की, रेलवे दंडाधिकारी मंजीत कुमार साहू, न्यायिक दंडाधिकारी पूजा पांडेय, उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह की पीठ ने चाईबासा में मामलों का निष्पादन किया। चक्रधरपुर में एडीजे प्रथम अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कृष्णा लोहरा और अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी अंकित कुमार सिंह की पीठ ने सुनवाई की।
हर तीन माह में होता है आयोजन: सचिव
डीएलएसए सचिव रवि चौधरी ने बताया कि झालसा के निर्देशानुसार हर तीन माह में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है। लोग अपने सुलहनीय मामलों के निष्पादन के लिए आवेदन कर सकते हैं। लोक अदालत से त्वरित न्याय मिलता है और अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम होता है।

