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INDIAN HERNIA SOCIETY CONFERENCE : आईएचएस के कांफ्रेंस में बोले एक्पर्ट्स, अगर ये है लक्षण तो हो सकता है हर्निया

by Vivek Sharma
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रांची : अगर आपके भी पेट के नीचे या जांघों के उपर किसी तरह की सूजन है और दबाने के बाद वह ठीक हो जाती है तो अलर्ट हो जाए। ये लक्षण हर्निया का हो सकता है। ये कहना है इंडियन हर्निया सोसायटी (आईएचएस) के कांफ्रेंस में आए सर्जंस का। जिसमें उन्होंने बताया कि ये सूजन कुछ देर के लिए होता है। जिसे दबाने से वह नार्मल हो जाता है। जबकि कुछ मामलों में हमेशा सूजन के साथ भारीपन महसूस होता है। इसे इग्नोर करने की बजाय तत्काल डॉक्टर से कंसल्ट करें। वहीं इसकी सर्जरी भी कराने की सलाह एक्सपर्ट्स ने दी। बता दें कि रेडिशन ब्लू में इंडियन हर्निया सोसायटी ने दो दिवसीय कांफ्रेंस का आयोजन किया था। जिसमें देश के कई नामी सर्जंस शामिल हुए।

ऐसे पहचाने हर्निया को


किसी आपरेशन के बाद सूजन आ जाए तो वह भी हर्निया हो सकता है। वहीं पेट और जांघ के बीच सूजन भी ग्रोइंग हर्निया का लक्षण हो सकता है। इसे इग्नोर करना खतरनाक हो सकता है। सूजन दिनभर में बढ़े और हाथ से दबाने पर नार्मल हो जाए तो यह भी गंभीर है। नाभि और प्राइवेट पार्ट के बीच किसी तरह की सूजन भी हर्निया है। जिसका एकमात्र इलाज सर्जरी ही है। हर्निया में लैप्रोस्कोपी और ओपन सर्जरी दोनों ही कारगर है।

गांवों में लगाएंगे कैंप : डॉ इरफान


कांफ्रेंस में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि नई तकनीक का हम झारखंड में स्वागत करते है। यहां के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में न जाना पड़े इसके लिए हर प्रयास को हमारा सपोर्ट रहेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के कैंप शहर से दूर दराज इलाकों में लगाएंगे। वहां पर कांफ्रेंस कर लोगों को बीमारियों के बारे में बताया जाएगा। वहीं मरीजों का इलाज भी कराया जाएगा। इससे पहले दो दिवसीय कांफ्रेंस में लाइव सर्जिकल वर्कशॉप, सीएमई सत्र और पैनल डिस्कशन हुआ। वहीं देशभर से जुटे पीजी स्टूडेंट्स को रिसर्च पेपर को लेकर वीके बंसल द्वारा सम्मानित किया गया।

सर्जन बोले, तकनीक से इलाज कारगर


कोई भी सूजन शरीर में ठीक नहीं होता। लेकिन पेट के नीचे और जांघ के बीच में सूजन हो रही है। खांसने पर भी सूजन जैसा महसूस होता है। लेकिन दबाने के बाद वह नार्मल पोजिशन में आ जाता है तो इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। जांच के बाद आपको सर्जरी करानी होगी। इसमें लेप्रोस्कोपी कारगर है। झारखंड में इसका इस्तेमाल कम हो रहा है। इसलिए हमने डॉक्टरों के साथ नई तकनीक पर चर्चा की है। जिससे कि यहां के मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। लैप्रोस्कोपी से इंफेक्शन होने की संभावना नहीं के बराबर होती है।
डॉ आशुरी कृष्णा, एम्स, दिल्ली

ज्यादातर मामलों में हर्निया स्वेलिंग होती है। प्राइवेट पार्ट में सूजन लंबे समय तक हो तो वह भी हर्निया का लक्षण हो सकता है। हर्निया जब बढ़ता है और पेट का हिस्सा बाहर आने लगता है। कब्ज, दर्द होना और नीचे के हिस्से में भारीपन महसूस होना भी हर्निया के लक्षण है। हर्निया की वजह से होने वाला सूजन शरीर के किसी भी पार्ट में हो सकता है। लैप्रोस्कोपी नई तकनीक है, जिसमें टांके कम लगते है।
डॉ रंजन कुमार, लैप्रोस्कोपिक सर्जन

कांफ्रेंस में इनका रहा सहयोग


ऑर्किड मेडिकल सेंटर के निदेशक सिद्धांत जैन, अनंत जैन, ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी जेनरल सह रिनल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ गीता प्रसाद, ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन सर्जन डॉ शंभु प्रसाद सिंह, ट्रेजरर लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ रंजन कुमार, डॉ पीके गुप्ता, डॉ अंजनी कुमार मौजूद थे।

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