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Jamshedpur Special Crime News : सरगना खोलेगा राज, कौन कर रहा था अंतरराज्यीय गैंग के लिए रेकी ?

ओडिशा गैंग का लोकल कनेक्शन खंगालने में जुटी पुलिस

by Mujtaba Haider Rizvi
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जमशेदपुर : परसुडीह थाना क्षेत्र के दयाल सिटी और गोविंदपुर के रॉक गार्डेन के फ्लैटों में चोरी की सनसनीखेज घटनाओं को अंजाम देने वाले अंतरराज्यीय चोर गिरोह के सदस्यों का लोकल कनेक्शन हो सकता है। यह चोर गिरोह किसी स्थानीय गैंग के बुलाने पर जमशेदपुर पहुंचा और यहां घटनाओं को अंजाम दे रहा था। स्थानीय अपराधी इन चोरों के लिए रेकी करते थे। पुलिस इस गिरोह का लोकल कनेक्शन तलाश करने में जुट गई है।
गौरतलब है कि गोविंदपुर थाना पुलिस ने घोड़ाबांधा हॉस्पिटल के सामने गर्म पत्थर इलाके से अंतरराज्यीय गिरोह के 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर बुधवार को जेल भेजा था। जो आरोपी गिरफ्तार किए गए थे, उसमें ओडिशा के पुरी के बासेलीसाही थाना क्षेत्र के लोकनाथ बस्ती निवासी तारा सिंह चौहान, इसी गांव का रहने वाला राहुल चौहान, मध्य प्रदेश के मुड़वारा कटनी का रहने वाला अजय चौहान, यहीं का आशीष चौहान, कटनी के बरवाड़ा थाना क्षेत्र के बीडकला गांव का बाबू महाराष्ट्र के गोंदिया और औरंगाबाद के छावनी थाना क्षेत्र का संदीप सोलंकी गिरफ्तार हुआ था। यह चोर गिरोह कई महीने से जमशेदपुर में डेरा डाले हुए था और यहां चोरी की घटनाओं को अंजाम देने में लगा हुआ था।

कौन है गैंग को सोनार से मिलाने वाला

इन लोगों के पास से चोरी का 99 ग्राम सोना बरामद हुआ, जो इन्होंने मानगो के सोनार अजय कुमार बर्मन के पास बेचा था।
पुलिस को शक है कि इनको सोनार का पता उनके किसी लोकल साथी ने ही बताया होगा। अब पुलिस इन सभी आरोपियों को रिमांड पर लेने का मन बना रही है। रिमांड पर लेकर इनसे पूछताछ की जाएगी। ये किसके कहने पर जमशेदपुर आए। इनको कौन मदद कर रहा था। मानगो के रहने वाले सोनार अजय कुमार बर्मन से भी पूछताछ होगी कि इन आरोपियों को उनके पास कौन लेकर आया था और चोरी के सोने की खरीद की डील करने में मध्यस्थ कौन था।

तारा सिंह खोलेगा गिरोह के राज

इस अंतरराज्यीय गिरोह का सरगना तारा सिंह चौहान है। सूत्र बताते हैं कि तारा सिंह चौहान ही गिरोह के राज खोलेगा। गोविंदपुर थाना प्रभारी भी मानते हैं कि इनका लोकल कनेक्शन हो सकता है। यह किसी के बुलाने पर जमशेदपुर आए होंगे। हो सकता है कोई उनकी मदद कर रहा हो। लेकिन यह भी संभव है कि यह लोग खुद ही जमशेदपुर पहुंचे हों। वह अपने अनुभव के आधार पर बताते हैं कि अक्सर ऐसे लोग खानाबदोश होते हैं। ये लोग ट्रेन पर सवार होकर रूट पर पड़ने वाले शहरों को निशाना बनाते हैं। इनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं होता। यह ट्रेन पर मांगते खाते या गुब्बारे वगैरह बेचते हुए किसी भी शहर में पहुंचते हैं। उस शहर में भी कोई छोटा-मोटा सामान बेचते हुए रेकी करते हैं और अक्सर बंद घरों को निशाना बनाते हैं।

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