
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के कराईकेला थाना अंतर्गत कोल्जमरो गांव में अंधविश्वास की काली करतूत के चलते एक असहाय महिला को डायन करार देकर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मर्मस्पर्शी घटना के उपरांत भुक्तभोगीयों का जीवन संकट और अभाव के भंवर में फंस गया था। इस आपदा की घड़ी में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) ने पीड़ित परिजनों तक पहुंचकर राहत का हाथ बढ़ाया है।
जानकारी के अनुसार बंदगांव प्रखंड के लंडूपोड़ा पंचायत के कोल्जमरो गांव में हुई इस नृशंस वारदात के बाद पीड़ित परिवार अत्यंत दयनीय अवस्था में जीवन व्यतीत कर रहा था। इस गंभीर परिस्थिति का संज्ञान लेते हुए पश्चिमी सिंहभूम के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा के अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर और प्राधिकार के सचिव रवि चौधरी के कुशल मार्गदर्शन में एक विशेष दल ने सीधे प्रभावितों के घर तक पहुंची । मौके पर पहुंचकर परिजनों के साथ संवाद किया, उनकी व्यथा सुनी तथा मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए उन्हें तात्कालिक संतानवना प्रदान किया।
इस दौरान प्रभावित परिवार को खाद्यान्न सामग्री समेत अन्य आवश्यक उपयोग की वस्तुएं वितरित की गईं। प्राधिकार का मुख्य ध्येय इस विकट समय में परिवार का आर्थिक रुप मदद देना और उनकी प्राथमिक आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने कड़े शब्दों में यह रेखांकित किया कि सभ्य समाज में पाखंड और अंधविश्वास के नाम पर घटित होने वाली ऐसी अमानवीय घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं। झालसा द्वारा ऐसे पीड़ित जनों को विधिक सहायता के साथ-साथ त्वरित राहत सामग्री मुहैया कराने के प्रयास निरंतर जारी हैं।
इस राहत एवं सहायता अभियान के दौरान बंदगांव प्रखंड के ग्राम विकास पदाधिकारी (VLW) योगेंद्र सुंडी, पंचायत सेवक राजू महतो, पारा लीगल वालंटियर (PLV) राजेंद्र महतो एवं राजेश कुमार नायक अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए सक्रिय रूप से सहयोग में जुटे रहे।
उल्लेखनीय है कि झालसा की ओर से ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण मामलों से प्रभावित परिवारों को विधिक अधिकार दिलाने और सामाजिक सुरक्षा का अहसास कराने के लिए समय-समय पर सहायता एवं विधिक साक्षरता अभियान संचालित किए जाते हैं, जिससे जरूरतमंदों को समय पर न्याय और संबल प्राप्त हो सके।
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