
रांची : राजधानी रांची में अपराधियों के दुस्साहस और उनके नेटवर्क की परतें अब एक-एक कर उधड़ने लगी हैं। कांके थाना क्षेत्र स्थित मंसूरी पेट्रोल पंप पर हुई फायरिंग और लूटपाट की सनसनीखेज वारदात को लेकर पुलिस ने जो खुलासे किए हैं, वे वाकई चौंकाने वाले हैं। जांच में सामने आया है कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड राहुल सिंह अपने गुर्गों को सिर्फ एकमुश्त रकम नहीं, बल्कि एक तयशुदा वेतन की तरह हर महीने सैलरी दिया करता था। अपराध की दुनिया में यह नया ट्रेंड इस बात की गवाही देता है कि किस तरह से संगठित गिरोह कॉर्पोरेट कल्चर की तर्ज पर अपने शूटरों और अपराधियों को पाल-पोस रहे थे।
मंथली सैलरी और इंसेंटिव वाला खूनी खेल
पुलिस रिकॉर्ड और एफआईआर के मुताबिक, राहुल सिंह अपने सिंडिकेट के सक्रिय सदस्यों को हर महीने करीब 40 हजार रुपये बतौर वेतन देता था। इतना ही नहीं, जुर्म की दुनिया में इंसेंटिव या बोनस का कल्चर भी यहां साफ नजर आया। गिरोह का कोई भी शूटर या गुर्गा जब किसी वारदात को अंजाम देता था, तो उसे प्रत्येक घटना के बाद अलग से 20 से 25 हजार रुपये थमा दिए जाते थे। पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी शमशाद अंसारी ने इस बात का खुलकर इकबाल किया है कि वह राहुल सिंह के इशारे पर ही आपराधिक कृत्यों को अंजाम देता था और उसे हर महीने यह तयशुदा रकम मिलती थी।
यह सारा काला कारोबार और अपराधियों की ऐशो-आराम की यह फंडिंग रंगदारी के जरिए वसूले गए रुपयों से हो रही थी। पुलिस के हाथ जो पैसे लगे हैं, उन्हें लेकर यह बात सामने आई है कि राहुल सिंह ने राजेंद्र महली के जरिए उन पैसों को अपने गुर्गों तक पहुंचाया था।
पुलिस से हाथापाई में गिर गई थी पिस्टल
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पुलिस चेकिंग अभियान चला रही थी। संदिग्ध हालात में भाग रहे एक मोटरसाइकिल सवार को रोकने की कोशिश की गई तो अफरा-तफरी मच गई। पुलिसिया कार्रवाई और हाथापाई के दौरान आरोपी शमशाद के पास मौजूद 7.65 एमएम की देसी पिस्टल जमीन पर गिर पड़ी। पूछताछ में यह भी बात सामने आई कि इसी अवैध हथियार से आरोपियों ने पुलिस पार्टी पर भी फायरिंग करने से गुरेज नहीं किया था। जब पुलिस ने इस हथियार के कागजात और वैधता की मांग की, तो आरोपी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
इस पूरी घटना के बाद रांची पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अपराधियों की निशानदेही पर भारी मात्रा में हथियार और अन्य सामान बरामद किए हैं। पुलिस के हत्थे चढ़े इस गिरोह के पास से एक देसी पिस्टल,कारतूस, खोखे, मोटरसाइकिल और हेलमेट जैसी चीजें जब्त की गई हैं। पुलिस अब यह खंगालने में जुटी है कि इन हथियारों की सप्लाई करने वाला मुख्य सप्लायर कौन था और इस सिंडिकेट के तार राज्य के दूसरे हिस्सों या जेल के भीतर से तो नहीं जुड़े हैं।
सिंडिकेट के अन्य चेहरों पर भी कस रहा शिकंजा
इस आपराधिक नेटवर्क में सिर्फ राहुल सिंह और शमशाद अंसारी ही शामिल नहीं हैं, बल्कि पुलिस की फाइलों में राजेंद्र महली, नितेश उरांव उर्फ मनीष तिर्की और दीपक लोहरा जैसे कई अन्य नाम भी जुड़ चुके हैं। पुलिस अब इन सभी की व्यक्तिगत भूमिकाओं की तकनीकी और दस्तावेजी जांच कर रही है। मकसद यह साफ करना है कि पेट्रोल पंप पर हुई फायरिंग लूटपाट का एक सामान्य मामला था या इसके पीछे किसी बड़े सिंडिकेट की सोची-समझी साजिश थी, जो इलाके में दहशत फैलाकर अवैध वसूली का साम्राज्य खड़ा करना चाहता था।
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