
रांची: सोचिए, एक डॉक्टर रोज सुबह अस्पताल पहुंचकर दर्जनों मरीजों का इलाज करता है, दवाइयां लिखता है और ऑपरेशन करता है… लेकिन एक दिन अचानक सरकार एक पोस्टर जारी करती है जिसमें उसी डॉक्टर को ‘लापता’ और ‘भगोड़ा’ करार दे दिया जाता है!
कुछ ऐसा ही अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में देखने को मिला है। विभाग ने हाल ही में राज्य के 631 ऐसे डॉक्टरों की सूची जारी की, जो कथित तौर पर लंबे समय से ड्यूटी से नदारद हैं या जिन्होंने नौकरी मिलने के बाद कभी अस्पताल में कदम ही नहीं रखा। लेकिन इस सूची के बाहर आते ही विभाग का ढुलमुल रवैया बेनकाब हो गया। वजह यह है कि लिस्ट में उन डॉक्टरों के नाम भी शामिल कर दिए गए हैं, जो बिना किसी नागा के अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अस्पताल में स्टेथोस्कोप, फाइलों में सन्नाटा!
इसका सबसे बड़ा उदाहरण बुंडू के अनुमंडलीय अस्पताल में देखने को मिला। यहां पदस्थापित डॉ. शोभा टोप्पो पिछले कई सालों से लगातार मरीजों का इलाज कर रही हैं। 2009 में बहाल हुईं डॉ. टोप्पो 26 अक्टूबर 2026 तक ड्यूटी पर तैनात थीं। लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग का विज्ञापन छपा, तो पता चला कि कागजों में तो उन्हें गायब मान लिया गया है। अब मजबूरी यह है कि मरीजों की देखभाल करने के बजाय डॉ. टोप्पो को अपने ‘जीवित और कार्यरत’ होने के सबूत लेकर सरकारी दफ्तरों की खाक छाननी पड़ रही है। सवाल उठना लाजिमी है कि जब डॉक्टर अस्पताल के वार्ड में मौजूद थीं, तो विभाग के रजिस्टर में उन पर रेड मार्क किसने लगाया?
1988 से 2023 तक का हिसाब, लेकिन 2009 का गणित सबसे उलझा
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई अस्पतालों में खाली पड़े पदों पर नई नियुक्तियां करने के लिए की जा रही है। डेटा पर नज़र डालें तो 1988 से लेकर 2023 के बीच नियुक्त 631 डॉक्टरों पर गाज़ गिरने वाली है। इसमें सबसे बड़ा आंकड़ा साल 2009 का है, जब बहाल हुए 308 डॉक्टरों को अनुपस्थित पाया गया है।
इससे पहले वर्ष 2025 में भी जेपीएससी से चुने गए 143 डॉक्टरों (86 मेडिकल अफसर और 57 विशेषज्ञ) की सेवाएं इसी आधार पर समाप्त की जा चुकी हैं।
सूत्रों के अनुसार मामला तूल पकड़ता देख झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सफाई दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि सूची में कुछ गलतियां रह गई हैं, जिन्हें जल्द ठीक कर लिया जाएगा। मंत्री का कहना है कि सरकार का मकसद अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करना और नए डॉक्टरों की बहाली का रास्ता साफ करना है। विभाग का इरादा चाहे जितना सुधारात्मक हो, लेकिन बिना जमीनी सत्यापन के बनाई गई इस तरह की सूचियों ने ईमानदारी से काम कर रहे डॉक्टरों का मनोबल तोड़ा है।
Read Also:631 Doctors Absent : झारखंड में 631 डॉक्टर ड्यूटी से गायब, स्वास्थ्य विभाग ने दी चेतावनी

