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Promotion Controversy : लैब एसिस्टेंट से डेमोनस्ट्रेटर और फिर बन गए थे एसोसिएट प्रोफेसर, लटकी बर्खास्तगी की तलवार

Promotion Controversy : उच्च शिक्षा विभाग ने अंतिम सत्यापन को 29 को बुलाई बैठक

by Mujtaba Haider Rizvi
Controversy over promotion from lab assistant to associate professor
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Jamshedpur : राजभवन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड के कई विश्वविद्यालयों में हुए प्रमोशन घोटाले का मामला मई 2025 में सामने आया था। जांच में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। प्रयोगशालाओं में कार्यरत लैब असिस्टेंट को पहले डेमोंस्ट्रेटर और फिर एसोसिएट प्रोफेसर तक बना दिया गया। यहां तक कि चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को भी नियमों को दरकिनार कर शिक्षक संवर्ग में प्रमोशन दे दिया गया। कुछ मामलों में ये लोग विभागाध्यक्ष के पद तक पहुंच गए।

जांच में यह भी सामने आया कि कई डेमोंस्ट्रेटर पहले अनुकंपा के आधार पर रूटीन क्लर्क के रूप में नियुक्त हुए थे। बाद में गलत तरीके से प्रमोशन पाकर वे डेमोंस्ट्रेटर बने और फिर विश्वविद्यालय शिक्षक बना दिए गए, जबकि अनुकंपा पर नियुक्त गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को किसी भी स्थिति में शिक्षक पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की गठित कमेटी ने मामले की जांच की, जिसमें कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई। कमेटी के अनुसार, गलत प्रमोशनों से न केवल विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि राजकोष पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ा।

जांच में यह भी पाया गया कि कई अभ्यर्थियों के पास नियुक्ति के समय स्नातकोत्तर (पीजी) डिग्री नहीं थी, जो विश्वविद्यालय शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य है। बाद में डिग्री हासिल कर उन्होंने प्रमोशन ले लिया। फिलहाल मामलों की जांच तेज कर दी गई है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

100 से अधिक को मिला प्रमोशन

झारखंड के सात प्रमुख विश्वविद्यालयों—रांची यूनिवर्सिटी, विनोबा भावे यूनिवर्सिटी (हजारीबाग), कोल्हान यूनिवर्सिटी (चाईबासा), बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल यूनिवर्सिटी (धनबाद), नीलांबर-पीतांबर यूनिवर्सिटी (डालटनगंज), सिदो-कान्हू यूनिवर्सिटी (दुमका) और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (रांची) से जुड़े डेमोंस्ट्रेटरों के प्रमोशन की जांच चल रही है। इन संस्थानों में 100 से अधिक मामलों की पड़ताल की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि डेमोंस्ट्रेटर को शिक्षक पद पर प्रमोट नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद 2011 में नियम संशोधन के बाद भी विश्वविद्यालयों ने नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर प्रमोशन दिए। अब उच्च शिक्षा विभाग इस मामले में अंतिम निर्णय लेने की तैयारी में है। सभी आरोपियों को अंतिम सत्यापन के लिए 29 जनवरी को रांची तलब किया गया है। इस बैठक में विश्वविद्यालयों के पदाधिकारी और प्रमोशन पाने वाले लोग शामिल होंगे। उसी दिन विभाग अंतिम फैसला लेगा, जिसके बाद रिपोर्ट कैबिनेट सचिव को भेजी जाएगी। इस घोटाले में शामिल शिक्षकों पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है।

कोल्हान विवि के सात आरोपी भी होंगे पेश

गलत प्रमोशन लेने के मामले में कोल्हान विश्वविद्यालय के सात कर्मी शामिल हैं। इन सभी पर अवैध रूप से प्रमोशन लेने का आरोप लगा है। इसमें से तीन लोग दिवंगत भी हो चुके हैं। अन्य सभी पांच कर्मी को 29 जनवरी को अपना पक्ष रखने के लिए उच्च शिक्षा विभाग रांची बुलाया गया है।

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