Jamshedpur : झारखंड में जल्द ही राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने वाले हैं। इसे लेकर एनडीए और इंडिया गठबंधन में दिलचस्प मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, एनडीए के पास इतने विधायक नहीं हैं कि वह अपने बूते राज्यसभा की एक सीट निकाल सके। लेकिन, पार्टी के दिग्गज नेता ऐसी रणनीति तैयार कर रहे हैं। जिससे कि सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। वह कोई ऐसे उम्मीदवार की तलाश में हैं जिसको भरपूर समर्थन देकर एक सीट निकाली जा सके।
यानि, साफ है कि अगर भाजपा अपना उम्मीदवार उतारती है तो बीजेपी के पास इतना संख्या बल नहीं है कि अपने प्रत्याशी को जिता सके। इस तरह, चुनाव में उतर कर फजीहत कराने से बेहतर है कि किसी दूसरे पर दांव लगा कर जीत की संभावनाएं बढ़ाई जाएं। इसके लिए पूर्व राज्यसभा सदस्य परिमल नथवाणी पर दांव लगाने की चर्चा चल रही है।
अगर भाजपा किसी अन्य उम्मीदवार पर अपना हाथ रखती है तो क्रास वोटिंग की संभावना बढ़ जाएगी। क्रास वोटिंग पर ही इस प्रत्याशी की जीत का सारा दारोमदार होगा। निर्दलीय उम्मीदवार चार वोटों का जुगाड़ करने के लिए इंडिया गठबंधन के ही विधायकों में अपना समर्थन खोजेगा।
गौरतलब है कि झारखंड से राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन का पिछले साल 4 अगस्त 2025 को निधन हो गया था। उनके निधन के बाद राज्यसभा की एक सीट खाली हुई है। इस सीट पर चुनाव होना है। इसके अलावा भाजपा के राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश 21 जून 2026 को राज्यसभा से बाहर आ रहे हैं। उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन दो सीटों पर चुनाव का बिगुल जल्द बजेगा। राज्यसभा की एक सीट निकालने के लिए 28 विधायकों की जरूरत पड़ती है। इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं। जबकि, एनडीए के पास विधायकों की संख्या 24 है। एनडीए के पास एक सीट निकालने के लिए चार विधायक घट रहे हैं।
यह है भाजपा का गणित
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ऐसी रणनीति तैयार कर रही है, जिसमें वह किसी निर्दलीय विधायक को समर्थन दे दें। उस निर्दलीय विधायक के फेवर में 24 वोट होंगे। ऐसे में अगर निर्दलीय विधायक चार अन्य वोटों का जुगाड़ इधर-उधर से कर लें तो यह सीट निकल सकती है।
चल रही इनकी चर्चा
चर्चा चल रही है कि भाजपा पूर्व राज्यसभा सदस्य परिमल नथवानी को चुनाव में खड़े होने के लिए तैयार कर रही है। कहा जा रहा है कि परिमल नथवानी निर्दलीय उम्मीदवार होंगे और एनडीए उन्हें पूरी तरह समर्थन करेगा।
इंडिया गठबंधन में भी खींचतान
दूसरी तरफ, इंडिया गठबंधन में भी खींचतान की बातें सामने आ रही हैं। झामुमो दोनों सीटों पर अपना उम्मीदवार लड़ाना चाहती है। जबकि, कांग्रेस एक सीट मांग रही है। दोनों को आरटीओ के बीच राज्यसभा की इन दोनों सीटों के लेकर कई बैठकें हो चुकी हैं। पिछले दिनों दोनों पार्टियों के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी। बाद में हालात सुधरे। अब देखना है कि विधान राज्यसभा चुनाव के दौरान झामुमो और कांग्रेस तालमेल बिठा पाती है या नहीं। अगर, दोनों में तालमेल बढ़िया रहता है तो झारखंड की यह दोनों सीटें इंडिया गठबंधन के खाते में जाएंगी।
कैसे होता है राज्य सभा का इलेक्शन
राज्यसभा के चुनाव में सीधे आम मतदाता वोटिंग नहीं करते। इस चुनाव में विधानसभा के सदस्य भाग लेते हैं। विधायक तय करते हैं कि राज्य सभा का सदस्य कौन बनेगा। एक उम्मीदवार को जीत के लिए कितने वोट चाहिए यह संख्या विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या और सीटों की संख्या पर निर्भर करती है।
यह है चुनाव का गणित
जैसे कि इस बार झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। अब जानते हैं कि इस बार राज्यसभा सदस्य पद के उम्मीदवार को जीतने के लिए कितने विधायकों के मतों की जरूरत होगी। विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं। इनमें से एक विधायक मनोनीत होता है। इसलिए विधानसभा में कुल निर्वाचित विधायकों की संख्या 80 हुई। अब इस संख्या को कुल सीटों की संख्या में एक जोड़ कर उससे भाग देना है और जो उत्तर आएगा उसमें फिर एक जोड़ देना है। झारखंड में इस बार दो सीटों पर चुनाव होना है। इसमें एक जोड़ देने से संख्या आई तीन। अब कुल विधायकों की संख्या 80 को तीन से भाग दिया तो जवाब आया 26 66। अब इसमें एक जोड़ दिया तो हो गया 27 66 यानि 28। अब साफ हो गया है कि इस बार के चुनाव में अगर कोई उम्मीदवार 28 विधायकों के वोट जुगाड़ कर लेता है तो उसे जीत मिल जाएगी।
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