मनरेगा योजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने विभागीय मंत्री को दी है जानकारी
नई योजना में वित्तीय भागीदारी के नए प्रावधानों के कारण करना होगा अधिक खर्च
विभाग की संयुक्त बैठक में योजनाओं की प्रगति और वित्तीय स्थिति पर हुई थी चर्चा
योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाने और जमीनी स्तर पर निगरानी की जरूरत
रांची : मनरेगा के स्थान पर 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही केंद्र प्रायोजित विकसित भारत-गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)- वीबी जी रामजी योजना से झारखंड सरकार पर करीब 1700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। मनरेगा योजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने यह जानकारी विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह को दी है।
अधिकारियों ने बताया कि वीबी जी रामजी केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका योजना है, जो मनरेगा की जगह लागू की जा रही है। इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी, लेकिन वित्तीय भागीदारी के नए प्रावधानों के कारण राज्यों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ने की संभावना है। झारखंड को भी इस नई व्यवस्था के तहत लगभग 1700 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं।
विभाग के बजट प्रावधान पर बढ़ेगा दबाव
गौरतलब है कि हाल ही में ग्रामीण विकास एवं ग्रामीण कार्य विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक में योजनाओं की प्रगति और वित्तीय स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई थी। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि नई योजना लागू होने के बाद राज्य को अतिरिक्त राशि खर्च करनी होगी, जिससे विभाग के बजटीय प्रबंधन पर दबाव बढ़ सकता है।
वित्तीय भार के प्रभाव से निपटने की रणनीति
बैठक में अतिरिक्त वित्तीय भार के प्रभाव और उससे निपटने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। समीक्षा के दौरान मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण विकास और रोजगार संबंधी योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता तथा गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ समय पर ग्रामीणों तक पहुंचे और इसके लिए जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी की जरूरत है। इसके साथ ही योजनाओं की प्रगति और व्यय की नियमित समीक्षा करने का भी निर्देश दिया।

