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Jharkhand High Court dismissed JPSC appeal: जेपीएससी को हाई कोर्ट से करारा झटका, असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति मामले में अपील खारिज, देना होगा एक लाख जुर्माना

आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को केवल परीक्षा फीस की राशि में छूट मिलती है, लेकिन उन्हें शुल्क जमा करना ही होता है।

by Reeta Rai Sagar
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Ranchi (Jharkhand) : झारखंड हाई कोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अनुसूचित जनजाति (एसटी) के एक उम्मीदवार की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने जेपीएससी द्वारा दाखिल अपील (एलपीए) को खारिज करते हुए आयोग पर एक लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकल पीठ के पूर्व के आदेश को बरकरार रखते हुए यह फैसला सुनाया है। इस मामले में सभी पक्षों की सुनवाई बीते दिनों पूरी हो चुकी थी, जिसके बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

उम्मीदवार ने अधिकतम अंक प्राप्त किए थे, फीस जमा करने में थी तकनीकी त्रुटि

इस मामले में प्रतिवादी मनोज कुमार कच्छप की ओर से अधिवक्ता सब्यसाची ने पैरवी की, जबकि जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने अपना पक्ष रखा था। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद जेपीएससी के अधिवक्ता ने बताया कि आयोग जल्द ही इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। जेपीएससी का कहना है कि आयोग द्वारा आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा में सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को परीक्षा शुल्क जमा करना अनिवार्य है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को केवल परीक्षा फीस की राशि में छूट मिलती है, लेकिन उन्हें शुल्क जमा करना ही होता है।

प्रतिवादी मनोज कुमार कच्छप द्वारा जमा कराई गई परीक्षा फीस तकनीकी कारणों से जेपीएससी के खाते में जमा नहीं हो सकी थी। इस पर हाई कोर्ट की एकल पीठ ने मनोज कुमार कच्छप के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि चूंकि उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश के आलोक में इंटरव्यू दिया है और वह उस परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी भी रहे हैं, और कई परीक्षाओं में एसटी अभ्यर्थियों से परीक्षा फीस भी नहीं ली जाती है, इसलिए उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।

एकल पीठ ने चार सप्ताह में नियुक्ति का दिया था आदेश, जेपीएससी ने दी थी चुनौती

हाई कोर्ट की एकल पीठ ने मनोज कुमार कच्छप की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए जेपीएससी को यह निर्देश दिया था कि वह चार सप्ताह के भीतर प्रार्थी को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त करे। एकल पीठ के इस आदेश के खिलाफ जेपीएससी ने हाई कोर्ट की खंडपीठ में अपील दाखिल कर इसे चुनौती दी थी, जिसे अब खंडपीठ ने खारिज कर दिया है। यह मामला जुलाई 2018 में जेपीएससी द्वारा नागपुरी भाषा के लिए एसटी उम्मीदवारों के लिए निकाली गई बैकलॉग वैकेंसी से संबंधित है, जिसके तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के चार पदों के लिए विज्ञापन संख्या 5/2018 जारी किया गया था। दस्तावेजों की जांच में प्रार्थी मनोज कुमार कच्छप को 85 अंकों में से 72.10 अंक दिए गए थे, लेकिन जब इंटरव्यू की सूची जारी हुई तो उनका नाम उसमें शामिल नहीं था।

इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर कोर्ट ने जेपीएससी को मनोज कुमार कच्छप को इंटरव्यू में शामिल कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि उनका परिणाम इस याचिका के अंतिम आदेश से प्रभावित होगा। इसके बाद प्रार्थी इंटरव्यू में शामिल हुए थे। जेपीएससी ने 23 दिसंबर, 2021 को रिजल्ट जारी किया था, लेकिन कोर्ट के आदेश के अनुपालन में एक पद का परिणाम रोक दिया गया था। बाद में कोर्ट ने मनोज कुमार कच्छप का रिजल्ट मंगाया था, जिसे जेपीएससी ने सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया था। इसमें कोर्ट को पता चला कि मनोज कुमार कच्छप उस पूरी परीक्षा में सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी हैं।

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