रांची : झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्य के मनरेगा कर्मियों का राज्य स्तरीय महाधरना सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। हड़ताल के 100वें दिन आयोजित इस महाधरना में हजारीबाग प्रमंडल समेत विभिन्न जिलों से पहुंचे मनरेगा कर्मियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई।
महाधरना को संबोधित करते हुए संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि मनरेगा कर्मी वर्षों से ग्रेड-पे आधारित वेतनमान, स्थायी समायोजन, सेवा सुरक्षा, दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति तथा समुचित मुआवजा सहित अन्य लंबित मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बार-बार आश्वासन और वार्ता के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिसके कारण हजारों मनरेगा कर्मी आंदोलन करने को मजबूर हैं।
संघ ने बताया कि 25 मई 2026 को विभागीय स्तर पर हुई वार्ता में कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई थी और समाधान की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब तक उस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इसके विपरीत आंदोलनरत कर्मियों पर प्रशासनिक कार्रवाई और दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे कर्मियों में निराशा बढ़ी है।
महाधरना में वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा कर्मी वर्षों से ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो सम्मानजनक वेतन मिल रहा है और न ही भविष्य की कोई सुरक्षा उपलब्ध है। ऐसे में अपनी मांगों के समर्थन में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन के अलावा उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।
संघ ने राज्य सरकार से टकराव और दंडात्मक कार्रवाई के बजाय संवाद और समाधान का रास्ता अपनाने की अपील की। साथ ही कहा कि मनरेगा कर्मी वार्ता के माध्यम से सम्मानजनक समाधान चाहते हैं और सरकार की सकारात्मक पहल का स्वागत करेंगे।
इस दौरान आंदोलन की सफलता और सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना के साथ हवन भी किया गया। संघ ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार बताया कि राज्य स्तरीय महाधरना आगामी दिनों में भी जारी रहेगा तथा आंदोलन के अगले चरण के तहत 17 जून 2026 से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।

