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JSSC CGL Exam : सचिवालय के 863 कर्मियों पर भी परीक्षा रद्दीकरण का असर, बाहर जमे रहे नवनियुक्त कर्मचारी, अब कई अंदर आए

by Nikhil Kumar
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रांची : झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले का सीधा असर नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों पर पड़ा है। इनमें सचिवालय में नियुक्त 863 कर्मी भी शामिल हैं। मंगलवार को बड़ी संख्या में नवनियुक्त कर्मचारी और अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति के भविष्य को लेकर प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटे रहे। सचिवालय में जेएसएससी-सीजीएल के माध्यम से सहायक प्रशाखा पदाधिकारी और कनीय सचिवालय सहायक के पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। वर्ष 2023 की भर्ती में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के 863 और कनीय सचिवालय सहायक के 335 पद शामिल थे। इसके अलावा प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी समेत विभिन्न विभागों के कई पदों पर भी नियुक्तियां की गई थीं।

सरकार के फैसले से नियुक्ति पाने वाले इन कर्मचारियों के सामने अब नौकरी की स्थिति को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया, परीक्षा पास की, नियुक्ति पत्र मिला और संबंधित कार्यालयों में योगदान भी दिया। ऐसे में परीक्षा में यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।मंगलवार को सचिवालय के बाहर काफी देर तक अभ्यर्थी और नवनियुक्त कर्मचारी जमे रहे। वे सरकार से अपना पक्ष रखने और नियुक्तियों के संबंध में स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि कल तक वे सचिवालय के अंदर सरकारी कामकाज कर रहे थे, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

इधर, सूत्रों के अनुसार अब इन अभ्यर्थियों को सचिवालय के अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। इसके बाद अभ्यर्थियों की नजर सरकार की ओर से होने वाली बातचीत और अगले निर्णय पर टिकी है। कर्मचारियों की मांग है कि सरकार उनके मामले में मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता निकाले, जिससे परीक्षा में कथित गड़बड़ी के दोषियों पर कार्रवाई भी हो और निर्दोष नियुक्त कर्मचारियों का भविष्य भी सुरक्षित रहे।
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने के बाद नियुक्त कर्मचारियों का विरोध अब सरकार के लिए एक अलग चुनौती बनता दिख रहा है। एक ओर परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और सुधार की मांग है, तो दूसरी ओर परीक्षा पास कर नियुक्ति पा चुके करीब दो हजार युवाओं के भविष्य का सवाल खड़ा हो गया है।

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