
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग -सीजीएल समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर फिलहाल झारखंड उच्च न्यायालय की रोक जारी रहेगी। इस चर्चित मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए हलफनामा पेश किया। दूसरी तरफ, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सरकार के इस जवाब का अध्ययन कर अपना प्रति-उत्तर दायर करने के लिए अदालत से कुछ समय मांगा है।
एक पत्र से नहीं छीनी जा सकती पक्की नौकरी
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान एक बेहद अहम टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महज एक प्रशासनिक अधिसूचना जारी करके सरकार पहले से तय या स्थाई नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थियों को इस तरह अचानक नौकरी से बेदखल नहीं कर सकती।
न्यायालय ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाए रखने के लिए आर.के. मलिक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों की समस्याओं और शिकायतों की निगरानी का जिम्मा जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को सौंपा गया है। कोर्ट ने अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि अगर विशेष जांच दल की ओर से किसी भी उम्मीदवार को बेवजह परेशान किया जाता है, तो वे सीधे जस्टिस गौतम चौधरी के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
सोशल मीडिया पर टिप्पणियों का मामला भी उठा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत का ध्यान सोशल मीडिया पर चल रही उस सामग्री की ओर खींचा, जिसमें न्यायालय के संदर्भ में भ्रामक और अनुचित टिप्पणियां की जा रही हैं। वकीलों ने इसे सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन बताते हुए इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अदालत इस पूरे मामले पर स्वतः संज्ञान ले रही है।
अगली विस्तृत सुनवाई 7 अक्टूबर को
अब इस याचिका पर अगली विस्तृत सुनवाई 7 अक्टूबर को सुबह 11:30 बजे तय की गई है। इस सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, श्रेय मिश्रा, इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने दलीलें दीं, जबकि राज्य सरकार का पक्ष महाधिवक्ता रोहिताश्य राय और वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने रखा।
इस कारण रद्द हुई थीं परीक्षाएं
सीआईडी जांच में सामने आए गंभीर गड़बड़ियों के बाद, राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात एक बड़ा कदम उठाते हुए उन सभी परीक्षाओं को निरस्त करने का ऐलान किया था, जिनका संचालन टेंडर पाने वाली एजेंसी टीडीपीएल के माध्यम से हुआ था। इसके अलावा, साल 2014 के बाद से आयोजित हुई तमाम भर्ती परीक्षाओं में धांधली की आशंका को देखते हुए व्यापक जांच का फैसला लिया गया था।
इसी फैसले के तहत कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने कुल 22 परीक्षाओं को पूरी तरह रद्द करने,6 भर्ती प्रक्रियाओं पर अस्थायी रोक लगाने,17 परीक्षाओं को सीआईडी जांच के दायरे में शामिल करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की थी, जिसे अब अभ्यर्थियों ने अदालत में चुनौती दी है।
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