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JSSC-CGL परीक्षा घोटाले की जांच में बड़ा मोड़, TCS से जुड़े समीर के बाद अब चार अभ्यर्थियों से होगी पूछताछ

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सेंधमारी का बड़ा खुलासा, टीसीएस की टीम से लेकर गिरिडीह के गांव तक जांच की आंच

by Kanchan Kumar
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गिरिडीह : जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच काफी तेज हो गई है। सीआईडी की विशेष टीम गिरिडीह जिले के बेंगाबाद इलाके में अपनी जांच का दायरा बढ़ा रही है। इस मामले में पहले पकड़े गए सहायक शाखा अधिकारी समीर कुमार उर्फ शालू से सीआईडी को कई गुप्त जानकारियां मिली हैं। समीर के बयानों के आधार पर ही अब बेंगाबाद के चार सफल अभ्यर्थियों को रांची स्थित सीआईडी मुख्यालय में तलब किया गया है।

​सीआईडी के इस कड़े कदम से बेंगाबाद और आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया है। परीक्षा में पास हुए कई अन्य अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की नींद उड़ गई है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे भर्ती नेटवर्क और पर्दे के पीछे छिपे मुख्य चेहरों की पहचान करने में जुटी हैं।

कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद

​इस मामले की शुरुआत 27 अगस्त की रात हुई थी। रांची से आई सीआईडी की टीम ने बेंगाबाद की एक मिठाई दुकान में छापा मारकर समीर कुमार को दबोचा था। समीर रांची में सरकारी पद पर तैनात था और त्योहार की छुट्टी में घर आया हुआ था। स्थानीय पुलिस की मदद से हुई इस कार्रवाई के दौरान समीर के घर से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए थे। पूछताछ के बाद उसे अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया था।
​जांच में सामने आया है कि समीर पहले मशहूर कंपनी टीसीएस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर काम कर चुका था। तकनीकी जानकारी होने के कारण उसे परीक्षा आयोजित कराने वाली तकनीकी सपोर्ट टीम में शामिल किया गया था। इसी दौरान उसने प्रश्नपत्र के बारकोड और अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक प्रक्रिया से जुड़ी बेहद संवेदनशील और गोपनीय जानकारियों तक अपनी पहुंच बना ली।

टीसीएस के कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

​सीआईडी अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि समीर ने इन गोपनीय जानकारियों का दुरुपयोग किस स्तर पर किया। इसके साथ ही परीक्षा से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था में शामिल टीसीएस के कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। सीआईडी यह पता लगा रही है कि इस फर्जीवाड़े में समीर के साथ और कौन-कौन से तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे।

​इसके अलावा अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र देने के एवज में मोटी रकम के लेन-देन की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी मोबाइल टावरों के कॉल डंप डेटा का सहारा ले रही है। परीक्षा की तारीख से पहले संदिग्धों और अभ्यर्थियों के बीच हुई बातचीत और बैंक खातों के माध्यम से हुए पैसों के हस्तांतरण का ब्योरा खंगाला जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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