
Saraikela : सरकार प्रदेश में बेहतर शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड के जामडीह गांव की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है। यहां उत्क्रमित मध्य विद्यालय जामडीह पिछले करीब पांच वर्षों से अपने भवन के बजाय गांव के कला भवन में संचालित हो रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, लगभग पांच साल पहले राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के चौड़ीकरण के दौरान विद्यालय का पुराना भवन तोड़ दिया गया था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें अस्थायी तौर पर गांव के कला भवन में शिफ्ट किया गया था। उस समय ग्रामीणों और अभिभावकों को उम्मीद थी कि जल्द ही नए भवन का निर्माण कराकर विद्यालय को वहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा। लेकिन पांच साल गुजरने के बाद भी यह इंतजार खत्म नहीं हुआ।
128 बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
वर्तमान में विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक कुल 128 बच्चे नामांकित हैं। कला भवन में पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण सभी कक्षाओं का संचालन व्यवस्थित तरीके से करना मुश्किल हो रहा है। सीमित जगह में बच्चों की पढ़ाई होने से शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
विद्यालय में शौचालय और सुरक्षित पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बताया जा रहा है। बारिश के मौसम में समस्या और बढ़ जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश का पानी कमरों में घुस जाता है, जिससे बच्चों को नमी और सीलन भरे वातावरण में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
चार साल से फाइलों में अटका निर्माण
ग्रामीणों का आरोप है कि नए विद्यालय भवन के निर्माण के लिए जमीन चिन्हित की जा चुकी है और बजट स्वीकृत होने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद पिछले करीब चार वर्षों से भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। निर्माण कार्य कागजी प्रक्रिया और प्रशासनिक फाइलों के बीच अटका हुआ है।
इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को अस्थायी व्यवस्था में इतने लंबे समय तक पढ़ाना उनकी शिक्षा और सुरक्षा के साथ अन्याय है।
डीसी और डीईओ से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय निवासियों ने सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त (डीसी) और जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि 128 बच्चों के भविष्य को देखते हुए नए विद्यालय भवन का निर्माण जल्द शुरू कराया जाना चाहिए। साथ ही, जब तक स्थायी भवन तैयार नहीं होता, तब तक बच्चों के लिए पर्याप्त कमरों, शौचालय और सुरक्षित पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए।

