
रांची : जेटेट नियमावली में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर उत्पन्न विवाद पर राज्य सरकार की गठित कमेटी ने सोमवार को विस्तृत समीक्षा की। बैठक की अध्यक्षता मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने की। बैठक में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को नियमावली से बाहर किए जाने के मुद्दे के साथ-साथ असुर और बिरहोर जैसी जनजातीय भाषाओं के संबंध में भी चर्चा हुई।
कमेटी के सदस्यों ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अधिकारियों से पूछा कि आखिर किन मानकों और प्रक्रिया के तहत कुछ भाषाओं को शामिल किया गया और कुछ को बाहर रखा गया। कमेटी ने विभाग से यह भी जानकारी मांगी कि पूर्व में आयोजित जेटेट परीक्षाओं में क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं के लिए किस प्रकार परीक्षा आयोजित की जाती रही है और उस समय लागू नियमावली में क्या प्रावधान थे।
बैठक में पूर्व की जेटेट नियमावलियों, परीक्षा पद्धति, भाषा चयन की प्रक्रिया और अभ्यर्थियों की संख्या से जुड़ी विस्तृत जानकारी कमेटी के समक्ष रखी गई। अधिकारियों ने पुराने नियमों और वर्तमान संशोधित प्रावधानों के बीच अंतर को भी प्रस्तुत किया। कमेटी ने विशेष रूप से यह जानने का प्रयास किया कि पूर्व की परीक्षाओं में भोजपुरी, मगही, अंगिका समेत अन्य भाषाओं की स्थिति क्या थी और वर्तमान नियमावली में बदलाव की आवश्यकता किन कारणों से महसूस की गई।
सूत्रों के अनुसार, कमेटी ने विभाग से सभी तथ्यात्मक, प्रशासनिक और कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। कमेटी की बैठक फिर 22 मई को बुलाई गई है। बैठक में मंत्री योगेंद्र प्रसाद, दीपिका पांडे सिंह, सुदिव्य कुमार, संजय प्रसाद सहित शिक्षा विभाग के वरीय पदाधिकारी शामिल थे।

