
Jamshedpur : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने मानगो नगर निगम में लंबित पड़ी करीब 13 करोड़ रुपये की 38 विकास योजनाओं का काम एक सप्ताह के भीतर शुरू कराने की मांग शनिवार को की है। उन्होंने अपर नगर आयुक्त से कहा कि यदि योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई प्रशासनिक बाधा है तो उसे तत्काल दूर किया जाए, लेकिन विकास कार्यों को रोकना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
सरयू राय ने शनिवार को जारी बयान में बताया कि चार दिन पहले उन्होंने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से मुलाकात की थी। इस दौरान उपायुक्त ने मानगो नगर निगम के अपर नगर आयुक्त, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के नगर आयुक्त एवं उप नगर आयुक्त तथा टाटा स्टील यूआईएसएल के महाप्रबंधक को भी बैठक में बुलाया था। बैठक में शहर की जनसुविधाओं और विकास कार्यों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि मानगो नगर निगम चुनाव से पहले निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद करीब 13 करोड़ रुपये की 38 योजनाओं का काम रोक दिया गया है। इन योजनाओं का सामूहिक शिलान्यास उनके और सांसद प्रतिनिधि की मौजूदगी में हो चुका है। इनमें नित्यानंद कॉलोनी की जल निकासी योजना भी शामिल है।
सरयू राय के अनुसार, इन 38 परियोजनाओं में 2.44 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले चार बड़े नाले, 6.14 करोड़ रुपये की दो सड़क योजनाएं तथा 3.53 करोड़ रुपये की 32 छोटी-बड़ी सड़क और नाली परियोजनाएं शामिल हैं। कुछ योजनाओं पर काम शुरू भी हो चुका था, लेकिन बाद में उन्हें भी रोक दिया गया।
उन्होंने कहा कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने और शिलान्यास के बाद योजनाओं का क्रियान्वयन रोकना गंभीर मामला है। यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक अड़चन है तो उसे दूर किया जाना चाहिए, न कि विकास कार्यों को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया जाए।
विधायक ने बताया कि बैठक के दौरान उपायुक्त ने भी इस बात से सहमति जताई कि यदि कोई बाधा है तो उसे दूर कर योजनाओं का काम शुरू कराया जाना चाहिए।
सरयू राय ने कहा कि मानगो नगर निगम को पूरी तरह झारखंड नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ही संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से किसी भी असंवैधानिक व्यक्ति या राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकने की अपील करते हुए कहा कि चाहे कोई किसी जनप्रतिनिधि का पति, भाई, देवर या पिता ही क्यों न हो, उसे प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम में मेयर, नगर आयुक्त और निर्वाचित बोर्ड की शक्तियां और जिम्मेदारियां कानून में स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अनुचित दबाव का सामना करता है तो वरिष्ठ अधिकारियों का दायित्व है कि वे अपने अधीनस्थों को संरक्षण दें और केवल नियमों के अनुरूप ही निर्णय लें।

