
पलामू : जिले से एक बेहद ही झकझोर देने वाली और इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आने के बाद चिकित्सक समेत 12 के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल परिसर में एक आवारा कुत्ते के मुंह में नवजात का शव देखे जाने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था। इस सनसनीखेज मामले में अब पुलिस ने कड़ा कदम उठाते हुए एक डॉक्टर, एक पूर्व डॉक्टर, ओटी तकनीशियन और निजी अस्पताल के संचालक समेत कुल 12 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। इस कार्रवाई से पूरे स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है।
अमानवीय घटना का ऐसे खुला राज
मंगलवार की सुबह एमएमसीएच परिसर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब लोगों ने एक कुत्ते को नवजात के शव को मुंह में दबाकर घूमते देखा। दिल दहला देने वाली इस घटना की तस्वीरें और खबरें जैसे ही मीडिया की सुर्खियों में आईं, पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत और पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने इस पर तुरंत संज्ञान लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशिक्षु आईएएस ऋतिक मेहता और सदर एसडीएम संजय पांडेय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की गई। टीम ने जब पड़ताल शुरू की, तो परत-दर-परत चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में सामने आया कि जिस नवजात का शव मिला है, उसका जन्म मेडिकल कॉलेज के ठीक बगल में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में हुआ था। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर एक और खौफनाक सच सामने आया। मंगलवार की सुबह करीब 5:46 बजे दो महिलाएं झोले में नवजात के शव को लेकर वहां पहुंची थीं और उसे पोस्टमार्टम हाउस के पास फेंक दिया था। इसके बाद सुबह 6:11 बजे वे दोनों वापस उसी निजी अस्पताल में लौटती हुई नजर आई थीं।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और एफआईआर
जिला प्रशासन ने बिना देर किए मंगलवार देर रात ही उस संदेहास्पद प्राइवेट अस्पताल को सील कर दिया। इसके बाद सदर प्रखंड के जमुने अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. प्रवीण उरांव के लिखित आवेदन पर मेदिनीनगर टाउन थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
टाउन थाना प्रभारी ज्योतिलाल रजवार ने बताया कि इस मामले में कुल 9 लोगों को नामजद और 3 को अज्ञात बनाया गया है। आरोपियों में निजी अस्पताल के संचालक उत्तम कुमार सिंह, डॉ. स्मृति सिंह कुशवाह, डॉ. एसके बिंदु, रानी, संध्या कुमारी, मीना, डॉली शर्मा और रिंकी के नाम शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य कड़ी धाराएं लगाई गई हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले के अनुसंधान की जिम्मेदारी सब इंस्पेक्टर अनिल कुमार यादव को सौंपी गई है।
अभी भी कई अनसुलझे सवाल और तलाश जारी
हालांकि पुलिस और प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए कागजी और कानूनी शिकंजा कस दिया है, लेकिन अभी भी कई बड़े सवाल हवा में तैर रहे हैं। बच्चे को जन्म देने वाली मां (जो कि एक नाबालिग बताई जा रही है) और उस अंचल में शव को फेंकने वाली दोनों महिलाओं की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। जांच में यह भी बात सामने आई है कि एमएमसीएच के कुछ डॉक्टर इस निजी अस्पताल में कंसल्टेंट के रूप में सेवाएं दे रहे थे और उन्होंने ही अवैध रूप से सिजेरियन ऑपरेशन में हिस्सा लिया था। बहरहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की तहकीकात में जुटी है, ताकि इस अमानवीय कृत्य के असली चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
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