
रामगढ़: रामगढ़ के कोयलांचल इलाके में किसानों का टेंशन बढ़ा हुआ है। चक्रवाती तूफान अर्णव ने यहां के अन्नदाताओं की रातों की नींद और दिन का चैन दोनों छीन लिया है।
ग्रामीण अंचलों में इस वक्त धान के खेत सुनहरी फसलों से आबाद हैं। कहीं धान की बालियां पककर पूरी तरह तैयार हैं, तो कहीं किसान इन्हें काटने की तैयारी में जुटे थे। फसल को तैयार करने में किसानों ने अपनी गाढ़ी कमाई और महीनों का पसीना बहाया है। बीज से लेकर खाद, पानी और मजदूरी तक-हर मोर्चे पर कर्ज और निवेश जुटाया गया है। लेकिन अब ऐन वक्त पर चक्रवात ने उनकी मेहनत पर पानी फेरने का खतरा पैदा कर दिया है।
किसानों के चेहरों पर साफ डर दिख रहा है कि अगर इस दौरान तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश हो गई, तो खेतों में लहलहाती फसलें पलभर में बिछ जाएंगी। जमीन पर गिरी फसल सड़ने लगती है, जिससे न सिर्फ कटाई मुश्किल होती है, बल्कि दाने भी काले पड़ जाते हैं।
लागत डूबने का मंडरा रहा है संकट
किसान रामपति महतो ने दर्द साझा करते हुए कहा कि खेती तो वैसे भी जुआ मानी जाती है, जिसका हर दांव मौसम के हाथ में होता है। इस साल धान की लागत निकालना ही अपने आप में एक चुनौती थी। अब जब फसल हाथ आने का वक्त आया, तो कुदरत की यह टेढ़ी नजर सब कुछ तबाह कर सकती है। यदि फसल को नुकसान पहुंचा, तो किसानों के सामने आर्थिक संकट का पहाड़ खड़ा हो जाएगा। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और चुकाए जाने वाले कर्ज का बोझ उन्हें अंदर से झकझोर रहा है।
फिलहाल, किसानों की निगाहें लगातार बादलों और मोबाइल पर आ रहे मौसम के अपडेट्स पर टिकी हैं। हर गुजरते घंटे के साथ उनकी धड़कनें तेज हो रही हैं। बस हर एक किसान की जुबान पर एक ही दुआ है कि यह चक्रवाती तूफान कमजोर पड़ जाए और उनकी महीनों की मेहनत सुरक्षित उनके घर तक पहुंच सके।
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