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Premature Baby Blindness : प्रीमैच्योर बेबी को भी होता ब्लाइंडनेस का खतरा, 100 में से 10 बच्चों की आंखों की चली जा रही रोशनी

by Rakesh Pandey
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फीचर डेस्क : आखों के बिना आपके लिए संसार की कोई सार्थकता नहीं। शरीर की संपूर्णता आंखों की तंदुरुस्ती में है, इसलिए आंखों की देखभाल के लिए जागरूक रहना जरूरी है। यह सही है कि समय के साथ हुए बदलाव ने आंखों की बीमारियों को भी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। आज स्थिति ये है कि प्रीमैच्योर यानी नवजात शिशु भी आंखों की समस्या से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं प्रीमैच्योर बच्चों में ब्लाइंडनेस तक का खतरा बढ़ गया है। ये बातें होटल लीलैक में आयोजित आईरिकॉन में देश के बड़े आई स्पेशलिस्ट्स ने कहीं। उन्होंने यह भी कहा कि गैजेट्स हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। इनका इस्तेमाल संभल कर करने की जरूरत है। नहीं तो आने वाले समय में जब हमारी आंखें ही ठीक नहीं होंगी, तो गैजेट्स का इस्तेमाल कैसे करेंगे।

जन्म के समय 2 किलो से कम वजन बन सकता है परेशानी

डॉ तापश रंजन पाड़ी

भुवनेश्वर से आए विट्रो रेटिना कंसल्टेंट डॉ. तापश रंजन पाड़ी ने कहा कि समय से पहले जन्म लेने वाले 100 में से 10 बच्चे ब्लाइंडनेस की चपेट में हैं। वहीं 30-40 परसेंट बच्चों को आंखों की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसका सही समय पर पता चल जाए तो इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 34 सप्ताह से पहले जन्मे बच्चों के पैरेंट्स को तत्काल उन्हें आंखों के डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

इसके अलावा ये भी ध्यान देने की जरूरत है कि बच्चे का वजन जन्म के समय दो किलो से कम है तो दो हफ्ते के अंदर जांच से ये पता लगाया जा सकता है कि बच्चे की आंखों में कोई समस्या तो नहीं है। अगर है तो उसका इलाज पूरी तरह से संभव है। ऐसे में हम बच्चों को अंधा होने से बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि रेटिनोपैथी आफ प्रीमैच्योरिटी का एक से डेढ़ महीने के अंदर इलाज न किया जाए तो बच्चा अंधा हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मोबाइल का इस्तेमाल आज के दिन में हमारी डेली लाइफ का हिस्सा बन गया है। लेकिन, इसे छोड़कर आउटडोर एक्टिविटी भी हमें करनी होगी। नहीं तो हमारी आंखों को नुकसान हो सकता है।

सावधानी बरतें, नहीं तो आंखें होंगी खराब

डॉ प्रमोद एस भेंडे

शंकर नेत्रालय चेन्नई से आए विट्रो रेटिना कंसल्टेंट डॉ. प्रमोद एस भेंडे ने कहा कि आज गैजेट्स हमारी लाइफ का जरूरी पार्ट है। इसके बिना हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन, हमें इसका इस्तेमाल संभल कर करना होगा। अभी नहीं संभले तो स्थिति भयावह हो सकती है। वहीं आंखों में कई तरह की समस्याएं भी हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा ज्यादातर समय गैजेट्स जैसे मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप पर गुजरता है। ऐसी स्थिति में हर 45 मिनट के बाद हमें कम से कम 15 मिनट का ब्रेक लेना जरूरी है। इससे आंखों को आराम मिलेगा। इस दौरान आउटडोर में जाकर बाहर का नजारा देखें तो आंखों की एक्सरसाइज हो जाएगी। वहीं गैजेट्स से दूर रहने से आंखों पर पड़ने वाला प्रभाव कम हो जाएगा। वहीं खानपान को लेकर कहा कि बैलेंस डाइट लें और बाहर खेलने या घूमने दिन भर में जरूर जाएं। इससे आप गैजेट्स से दूर रहेंगे। ये आपकी आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद साबित होगा।

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