Home » Jamshedpur News : मुंशी प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर बच्चों ने काव्य और कहानी पाठ से जीवंत की साहित्यिक विरासत

Jamshedpur News : मुंशी प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर बच्चों ने काव्य और कहानी पाठ से जीवंत की साहित्यिक विरासत

'नन्हें स्वर' कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने 'गोदान', 'ईदगाह', 'पंच परमेश्वर' सहित कालजयी रचनाओं का किया प्रभावशाली पाठ

by Arvind Shrivastava
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jamshedpur : हिंदी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर जमशेदपुर में साहित्यिक संस्था निनाद द्वारा आयोजित ‘नन्हें स्वर’ कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने कविता, काव्य एवं कहानी पाठ के माध्यम से प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत को जीवंत कर दिया। सी.पी. समिति मध्य विद्यालय, केबुल बस्ती में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से साहित्य, संवेदनशीलता और सामाजिक मूल्यों का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमित कुमार सिंह की अध्यक्षता में मां सरस्वती एवं मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। प्रतियोगिता में कक्षा छह से दसवीं तक के विद्यार्थियों ने मुंशी प्रेमचंद के जीवन और साहित्य पर आधारित कविता, काव्य एवं कहानी पाठ प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता में कक्षा सात की आयुषी यादव ने प्रथम, कक्षा नौ के समर कुमार ने द्वितीय तथा कक्षा छह की जिया कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं सहित सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कालजयी रचनाओं का हुआ प्रभावशाली मंचन

विद्यार्थियों ने मुंशी प्रेमचंद के जीवन परिचय के साथ उनकी अमर कृतियों ‘गोदान’, ‘गबन’, ‘ईदगाह’, ‘नमक का दरोगा’, ‘पंच परमेश्वर’, ‘पूस की रात’ और ‘कफ़न’ का प्रभावशाली पाठ प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को प्रेमचंद के साहित्य में निहित मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक समानता और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया।

‘बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना समय की आवश्यकता’

विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद केवल साहित्यकार नहीं, बल्कि भारतीय समाज के सच्चे दर्पण थे। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज के वंचित और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की पीड़ा तथा संघर्ष को स्वर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में बच्चों में पुस्तकों के प्रति रुचि विकसित करना अत्यंत आवश्यक है और ऐसे साहित्यिक आयोजन भाषा, संस्कार, संवेदनशीलता तथा आत्मविश्वास के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

‘प्रेमचंद का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक’

निनाद संस्था की संस्थापक पूनम महानंद ने कहा कि संस्था का उद्देश्य बच्चों को साहित्य, संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं आज भी ईमानदारी, करुणा, सामाजिक समानता और मानवता का संदेश देती हैं। ऐसे आयोजन बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने के साथ उनमें अध्ययन और साहित्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करते हैं।
कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति के महासचिव परमानंद कौशल, उपाध्यक्ष सालिक दास देवांगन, निनाद संस्था के आकांक्षा, चंद्रमोहन सोरेन, हिमांशु और शुभम कुमार पांडेय ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में मनीष सिंह ‘वंदन’ उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विद्यालय की अंग्रेजी माध्यम शाखा की प्रधानाध्यापिका लुबना नूर खान सहित कौशिक दत्ता, अर्चना सिंह, त्रिलोचन कौर, सीमा, संगीता मेरी सोरेन, हीरादास मानिकपुरी, अनुसियां कुमारी, रेखा कुमारी, तारकेश्वरी देवी, सुमन सिंह, अनुष्का सिंह, रिचा मिश्रा, मेनका कुमारी, सुमन कुमारी, रीता शर्मा, कृतिका सिंह, सोनम शर्मा तथा विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों के सम्मान, पुरस्कार वितरण और राष्ट्रगान के साथ हुआ। आयोजन ने यह संदेश दिया कि साहित्य केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी में संवेदनशील, जागरूक और संस्कारित नागरिक तैयार करने का सशक्त माध्यम भी है।

Related Articles

Leave a Comment