
चक्रधरपुर : दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल में लगातार हो रहे रेल हादसों के सिलसिले पर विराम लगता नहीं दिख रहा है। शुक्रवार को दोपहर में जिरौली के पास एक चलती मालगाड़ी की बोगी बेपटरी हो गई, जिसके कारण मुख्य रेल मार्ग की अप लाइन पर ट्रेनों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया। इस हादसे में रेलवे के ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) और सिग्नलिंग के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है।
दोपहर में हुआ हादसा, यात्रियों को हुई परेशानी
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह घटना शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 से 1:00 बजे के बीच किलोमीटर संख्या 406/33 पर घटित हुई। अप मेन लाइन पर दौड़ रही मालगाड़ी का एक वैगन अचानक पटरी से उतर गया। घटना की खबर मिलते ही चक्रधरपुर मंडल मुख्यालय से राहत सह दुर्घटना राहत ट्रेन (ART) को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।
अप लाइन पर यातायात पूरी तरह बाधित होने के कारण रेलवे प्रशासन को डाउन लाइन से यात्री ट्रेनों का परिचालन कराना पड़ा। सिंगल लाइन से आवाजाही के चलते ट्रेनों के परिचालन पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे कई यात्री ट्रेनें देरी से चलीं और यात्रियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी।
मॉक ड्रिल के 30 घंटे के भीतर पोल खुली
इस दुर्घटना ने रेल प्रशासन के सुरक्षा दावों की कलई खोलकर रख दी है। गौरतलब है कि इस हादसे से महज 30 घंटे पूर्व ही चक्रधरपुर मंडल के बंडामुंडा में रेलवे ने आपातकालीन स्थितियों से निपटने और राहत कार्यों की तत्परता परखने के लिए एक बड़ा ‘मॉक ड्रिल’ आयोजित किया था। लेकिन मॉक ड्रिल की स्याही सूखने से पहले ही जिरौली हादसे ने रेलवे की वास्तविक तैयारियों और मेंटेनेंस व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
लगातार हादसों से उठते गंभीर सवाल
चक्रधरपुर मंडल में मालगाड़ियों का बेपटरी होना अब आम बात बनती जा रही है। हाल ही में राउरकेला स्टील प्लांट (RSP) परिसर के भीतर भी एक मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई थी, हालांकि तब रेलवे ने उसे प्लांट का आंतरिक मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया था। परंतु बार-बार पटरियों से उतरते वैगन यह संकेत दे रहे हैं कि रेल पटरियों (Tracks) की स्थिति और रखरखाव (Maintenance) में भारी लापरवाही बरती जा रही है। इसके साथ ही मालगाड़ियों के वैगनों की यांत्रिक जांच सही तरीके से नहीं हो रही है और संरक्षा (Safety) निगरानी तंत्र निष्प्रभावी साबित हो रहा है।
बुनियादी जवाबदेही और सुधार की मांग
रेल दुर्घटनाओं के बाद अमूमन रेलवे प्रशासन राहत कार्य चलाकर और पटरियों को दुरुस्त कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है। लेकिन इस रवैए से सुरक्षा संबंधी बुनियादी सवाल समाप्त नहीं होते।
जवाबदेही तय क्यों नहीं?
क्या हादसों की निष्पक्ष व गहन जाँच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाती है?
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो
दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों और सुधारात्मक कदमों की रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
लापरवाही पर एक्शन कब?
लगातार हो रही लापरवाही के लिए रेलवे बोर्ड जिम्मेदार उच्च अधिकारियों पर क्या सख्त कदम उठाएगा?
निष्कर्ष
फिलहाल जिरौली में हुए नुकसान के आधिकारिक आकलन और जाँच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है। रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड और चक्रधरपुर मंडल प्रशासन के सामने केवल परिचालन बहाल करने की ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाने और यात्रियों व कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बहुत बड़ी चुनौती है।

