
Ranchi : सीएम हेमंत सोरेन की मां के निधन पर झारखंड में शोक की लहर है। सीएम ने ट्वीट किया है कि पिता के जाने के बाद एक मां की छांव बची थी, वह भी प्रकृति की गोद में समा गई। इसके बाद उन्होंने लिखा मां। यह अकेला एक शब्द सीएम की व्यथा बताने के लिए काफी है।
झारखंड के दिशोम गुरु और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने का वह खास पल अब उनकी पत्नी रूपी सोरेन की यादों से भी जुड़ गया है। रूपी सोरेन का निधन होने के बाद राष्ट्रपति भवन में आयोजित उस सम्मान समारोह की तस्वीर एक बार फिर चर्चा में है।
शिबू सोरेन को लोक कल्याण और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म भूषण दिया गया था। केंद्र सरकार ने इसी वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उनके नाम की घोषणा की थी।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिबू सोरेन को पद्म भूषण प्रदान किया था। चूंकि यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया था, इसलिए उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने परिवार की ओर से यह सम्मान ग्रहण किया था। उस समय विधायक कल्पना सोरेन भी उनके साथ मौजूद थीं।
खास बात यह रही कि रूपी सोरेन उस समय अस्वस्थ चल रही थीं। इसके बावजूद वह अपने पति शिबू सोरेन के सम्मान का साक्षी बनने और पद्म भूषण ग्रहण करने के लिए दिल्ली पहुंची थीं। परिवार के लिए यह शिबू सोरेन के लंबे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से जुड़ा बेहद भावुक अवसर था।
शिबू सोरेन का सार्वजनिक जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने लंबे समय तक आदिवासी समाज के बीच सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया। वह लोगों से नशे से दूर रहने, शिक्षा को अपनाने और अपनी जमीन व मेहनत से जुड़े रहने की अपील करते थे।
गांव-गांव की सभाओं में शिबू सोरेन खेती और पशुपालन को आत्मनिर्भरता का माध्यम बताते थे। उनका मानना था कि शिक्षा के जरिए समाज को शोषण से बाहर निकालने में मदद मिल सकती है।
शिबू सोरेन के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। झारखंड के अलावा आसपास के राज्यों से भी लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। अब रूपी सोरेन के निधन के बाद पद्म भूषण ग्रहण करते हुए उनकी वह तस्वीर परिवार की भावुक स्मृतियों का हिस्सा बन गई है।
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