नई दिल्ली : supreme court on SC ST : सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार यानी 1 अगस्त को अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया। सर्वोच्च अदालत ने एससी-एसटी कोटा के अंदर वाले कोटा को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने कहा कि राज्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों में सब-कैटेगरी बना सकते हैं। ऐसा किया जाना असमानता के खिलाफ नहीं है। इससे मूल और जरूरतमंद जातियों को रिजर्वेशन का अधिक फायदा मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि अब राज्य सरकारों को ये अधिकार होगा कि वे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति यानी (एससी/एसटी) रिजर्व्ड कैटेगरी ग्रुप में अंतर-पिछड़ेपन के आधार पर सब-कैटेगरी बना सकती हैं। वहीं इस फैसले के बाद राज्य सरकारें इस पर कानून भी बना सकेंगी।
सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि राज्य अनुसूचित जातियों और जनजातियों की लिस्ट के अंदर एक उप-वर्ग तैयार कर सकते हैं। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते समय 2004 के ईवी चिनैय्या बनाम आंध्र प्रदेश मामले का भी जिक्र किया। सीजेआई ने कहा कि हमने 2004 में ईवी चिनैय्या मामले में दिए गए फैसले को खारिज कर दिया है।
supreme court on SC ST : क्या है ईवी चिनैय्या मामला
बता दें कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जातियों की सूची तैयार की गई है। इस सूची में उन समूहों की पहचान करने के लिए आंध्र प्रदेश राज्य ने न्यायमूर्ति रामचंद्र राजू की अध्यक्षता में एक आयोग बनाया था, जो राज्य में व्यावसायिक कॉलेजों में प्रवेश और राज्य सरकार की सेवाओं में नियुक्ति में अनुसूचित जातियों के आरक्षण का लाभ हासिल नहीं कर पाए थे।
supreme court on SC ST : 57 जातियों को 4 वर्ग में बांटा
वहीं आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद कुछ मुकदमे भी दर्ज हुए। राज्य ने इस रिपोर्ट को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजा। वहीं न्यायमूर्ति रामचंद्र राजू आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए, राज्य ने एक अध्यादेश के जरिए राष्ट्रपति सूची में सूचीबद्ध 57 जातियों को परस्पर पिछड़ेपन के आधार पर 4 समूहों में बांटा गया। इसमें हर समूह के लिए आरक्षण में अलग कोटा तय किया।
वहीं राष्ट्रपति की तरफ से जारी सूची में शामिल जातियों को ए, बी, सी और डी के रूप में वर्गीकृत किया गया। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत अनुसूचित जातियों को राज्य के शैक्षणिक संस्थानों और राज्य की सेवाओं में पिछड़े वर्ग के लिए 15% आरक्षण देने के लिए 4 भागों में बांटा गया। इसमें ग्रुप ए को 1%, ग्रुप बी को 7%, ग्रुप सी क 6% और ग्रुप डी को 1% आरक्षण देने की बात कही गई।
supreme court on SC ST : एससी ने इस फैसले को किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 2004 के ईवी चिन्नैया वर्सेस आंध्र प्रदेश स्टेट जस्टमेेंट को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि एससी/ एसटी का सब-क्लासिफिकेशन संविधान के आर्टिकल 341 के विपरीत है, जो राष्ट्रपति को एससी/एसटी सूची तैयार करने का अधिकार देता है।
supreme court on SC ST : एक ही सब-कैटेगरी को नहीं मिलेगा 100% आरक्षण
शीर्ष न्यायालय ने कहा कि कोटा के भीतर कोटा तर्कसंगत अंतर के आधार पर होगा। वहीं राज्य इसे लेकर मनमर्जी से काम नहीं कर सकते। इस दिशा में राज्यों की जो भी गतिविधियां होंगी, वो न्यायिक समीक्षा के अधीन होंगी। कोई भी राज्य एक ही सब-कैटेगरी को 100 फीसदी आरक्षण नहीं दे सकता है। साथ ही कोर्ट ने राज्यों को हिदायत दी कि एससी-एसटी रिजर्वेशन में सब-क्लासिफिकेशन राजनीतिक उद्धेश्यों को पूरा करने के आधार पर नहीं होना चाहिए।
supreme court on SC ST : फैसला कई मामलों में अहम
बता दें कि यह फैसला कई मायनों में अहम है। इससे एससी-एसटी को मिलने वाले रिजर्वेशन में भी एक अलग आरक्षण व्यवस्था लागू करना है। इसका मकसद एससी-एसटी के अंदर जो जातियां ज्यादा जरूरतमंद हैं, जिन्हें ज्यादा भेदभाव का शिकार होना पड़ता है, उनको ज्यादा लाभ मिले, जिससे समाज के विकास की मुख्यधारा में वे आगे बढ़ सकें। वहीं फैसले से एससी-एसटी में अधिक कमजोर जातियों को अधिक फायदा मिल सकेगा।
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