
Jamshedpur : टाटा पावर कंपनी लिमिटेड की सहायक कंपनी टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (टीपीआरईएल) ने तमिलनाडु के कयथार में 100 मेगावाट के ग्रुप कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट (TNGC-2) को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है। वेल्लालनकोट्टई और नालंधुला गांवों में स्थापित इस परियोजना के चालू होने के साथ कंपनी का यूटिलिटी रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो बढ़कर 12.3 गीगावाट हो गया है। वहीं, कंपनी की कुल ऑपरेशनल क्षमता 7 गीगावाट के पार पहुंच गई है।
टाटा समूह की कंपनियों को मिलेगी हरित बिजली
परियोजना से टाटा समूह की तीन कंपनियों को स्वच्छ बिजली की आपूर्ति की जाएगी। इसमें टीपी सोलर लिमिटेड को 40.625 मेगावाट, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड को 53.125 मेगावाट और टाटा रियल्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को 6.25 मेगावाट बिजली मिलेगी। इससे टाटा समूह के सतत संचालन व डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
हर साल 240.63 मिलियन यूनिट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन
100 मेगावाट का यह सोलर प्रोजेक्ट सालाना करीब 240.63 मिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा करेगा। इससे हर वर्ष लगभग 1.5 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। परियोजना से उत्पन्न बिजली कयथार 400 केवी ग्रिड सबस्टेशन के माध्यम से संबंधित लाभार्थी कंपनियों तक पहुंचाई जाएगी।
पहली बार एफटीसी सिंगल एक्सिस ट्रैकर का इस्तेमाल
परियोजना की प्रमुख विशेषता भारत में टाटा के किसी प्रोजेक्ट में पहली बार ‘फ्लेक्सिबल टेरेन कम्पैटिबल’ (FTC) सिंगल एक्सिस ट्रैकर तकनीक का इस्तेमाल है। परियोजना में 2,61,660 मोनो पीईआरसी बाइफेशियल सोलर मॉड्यूल लगाए गए हैं। यह तकनीक अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में सौर पैनलों की कार्यक्षमता बढ़ाने और बिजली उत्पादन को अधिकतम करने में मदद करेगी।
5.3 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता पाइपलाइन में
टीपीआरईएल की 7 गीगावाट की ऑपरेशनल क्षमता में 5.7 गीगावाट से अधिक सोलर और 1.3 गीगावाट विंड एनर्जी एसेट्स शामिल हैं। कंपनी के पास विकास के विभिन्न चरणों में 5.3 गीगावाट की अतिरिक्त परियोजनाएं भी हैं। इनमें 2.2 गीगावाट सोलर और 3.1 गीगावाट विंड प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिन्हें अगले 6 से 24 महीनों में चरणबद्ध चालू करने की योजना है।
कंपनी के अनुसार, कयथार परियोजना बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक के साथ पूरा करने की उसकी क्षमता को दर्शाती है। यह परियोजना भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य में भी योगदान देगी।

