
साहिबगंज : साइबर ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। झारखंड स्थित साहिबगंज जिले के बरहरवा थाना क्षेत्र में रहने वाले गौतम चंद्र दास साइबर अपराधियों के ऐसे शातिराना जाल में फंसे कि दो महीने के भीतर अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई करीब 1.20 करोड़ रुपये गंवा बैठे। यह पूरी रकम उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए संजोकर रखी थी।
ऐसे शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट का खेल
ठगी की शुरुआत जून में हुई। अपराधियों ने पीड़ित को कॉल करके खुद को सीबीआई का बड़ा अधिकारी प्रदीप सिंह बताया। फर्जी अफसर ने गौतम चंद्र दास को डराते हुए कहा कि उनके खिलाफ सीबीआई में एक बहुत गंभीर केस दर्ज है और उन्हें किसी भी वक्त गिरफ्तार किया जा सकता है।
इसके बाद ठगों ने उन्हें वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया।
घर में ही बनाई फर्जी सीबीआई अदालत
ठगों की साजिश का सबसे हैरान करने वाला पहलू उनकी कार्यशैली थी। उन्हें दो महीने तक नजरबंद रखा। पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल के जरिए डराकर रखा गया, ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें।
तीन बार फर्जी पेशी
शातिरों ने स्क्रीन पर फर्जी सीबीआई कोर्ट का सेटअप तैयार किया। पीड़ित को वीडियो कॉल के जरिए तीन बार इस नकली अदालत में पेश किया गया और केस खत्म करने के नाम पर मोटी रकम की मांग की गई।
10 बार में ऐंठे 1.20 करोड़ रुपये
मुख्यालय डीएसपी सह साइबर सेल के नोडल अधिकारी रविकांत साव की जांच के मुताबिक, अपराधियों ने आरटीजीएस के जरिए 10 अलग-अलग किस्तों में पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करवाए। पहला बड़ा ट्रांजैक्शन 20 जून को 50 लाख रुपये का हुआ था और आखिरी लेन-देन 24 अगस्त को 5 लाख रुपये का किया गया।
रिश्तेदार को बताई आपबीती, तब खुली पोल
लगातार पैसे देने के बाद जब पीड़ित का शक गहराया, तो उन्होंने हिम्मत जुटाकर अपने एक रिश्तेदार को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद मामला साहिबगंज थाना तक पहुंचा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए साहिबगंज जिले के एसपी अमित कुमार सिंह ने डीएसपी रविकांत साव के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया है। इस टीम में साहिबगंज थाना के इंस्पेक्टर और साइबर सेल के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। फिलहाल पुलिस बैंक खातों, फोन नंबरों और लेन-देन के स्रोतों की पड़ताल कर रही है, ताकि जालसाजों तक पहुंचा जा सके।

