
जमशेदपुर : कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% MDR लगाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। इस संबंध में कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेश सोंथालिया ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
सोंथालिया ने कहा कि यह निर्णय देश के 8 करोड़ से अधिक व्यापारियों, विशेषकर कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे और MSME व्यापारियों के हितों के खिलाफ है।
कैट ने अपने पत्र में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए हैं
1. व्यापारी की लागत पर सीधा बोझ
यह राशि सीधे व्यापारी की लागत में जुड़ेगी। कम मार्जिन वाले व्यापारों में इसका असर बेहद गंभीर होगा।
2. टर्नओवर को मुनाफा समझने की भूल
₹10 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर होने का अर्थ ₹10 करोड़ का लाभ होना नहीं है। रिटेल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, FMCG, हार्डवेयर, मोबाइल, ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में शुद्ध मुनाफा (Net Margin) बहुत सीमित होता है। टर्नओवर पर MDR लगने से व्यापारी के वास्तविक मुनाफे पर आनुपातिक रूप से बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
3. डिजिटल इंडिया के सिपाहियों पर ही शुल्क क्यों?
देश के व्यापारियों ने ही नकद से डिजिटल भुगतान की ओर संक्रमण को सफल बनाया है। आज गली-मोहल्ले की छोटी दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक UPI स्वीकार कर रहे हैं। इसी व्यवस्था पर अतिरिक्त शुल्क लगाना व्यापारियों के साथ अन्याय है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की लागत का भार अकेले व्यापारी पर नहीं डाला जाना चाहिए।
4. ₹2,000 की सीमा अव्यावहारिक है
आज के समय में ₹2,000 से अधिक का लेनदेन सामान्य है। ₹5,000 का इलेक्ट्रिकल सामान, ₹8,000 का मोबाइल एक्सेसरीज ऑर्डर, ₹15,000 की हार्डवेयर खरीद या ₹25,000 का कंज्यूमर प्रोडक्ट – इनमें लेनदेन की राशि बड़ी दिखती है, पर व्यापारी का मार्जिन बहुत कम होता है। केवल लेनदेन की राशि के आधार पर शुल्क लगाना व्यापार की वास्तविकता को नहीं दर्शाता।
5. अंततः बोझ ग्राहक पर पड़ेगा
लागत बढ़ने पर व्यापारी के पास तीन ही विकल्प बचते हैं – अपना मुनाफा घटाए, अन्य खर्चे कम करे, या लागत को कीमत में जोड़े। ऐसे में MDR का असर अंततः उपभोक्ताओं पर महंगाई के रूप में पड़ेगा।
6. MSME और छोटे व्यापारियों पर दोहरी मार
एक तरफ सरकार MSME को मजबूत करने के लिए योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ भुगतान पर अतिरिक्त लागत उनकी वर्किंग कैपिटल और मुनाफे पर दबाव डालेगी।
कैट की प्रमुख मांगें
कैट ने भारत सरकार से मांग की है कि
1. ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4% MDR के प्रस्ताव को तुरंत वापस लिया जाए।
2. मर्चेंट UPI लेनदेन के लिए जीरो-MDR की व्यवस्था को यथावत जारी रखा जाए।
3. किसी भी प्रकार का शुल्क लगाने से पहले कैट सहित प्रमुख व्यापारिक संगठनों और MSME प्रतिनिधियों के साथ व्यापक परामर्श किया जाए।
4. कम मार्जिन वाले व्यवसायों और छोटे व्यापारियों को किसी भी प्रकार के लेनदेन शुल्क से सुरक्षित रखा जाए।
5. UPI ईकोसिस्टम की स्थिरता के लिए सरकार, RBI, NPCI, बैंक, फिनटेक कंपनियों और व्यापारिक संगठनों की एक संयुक्त समिति का गठन किया जाए।
सोंथालिया ने कहा कि देश का व्यापारी वर्ग Digital India और Ease of Doing Business का सबसे मजबूत साझेदार रहा है। हम डिजिटल भुगतान के विस्तार के पक्षधर हैं, लेकिन डिजिटल भारत की सफलता की कीमत व्यापारियों पर अतिरिक्त लेनदेन शुल्क लगाकर नहीं वसूली जानी चाहिए। हमें विश्वास है कि सरकार व्यापारियों की इस जायज चिंता पर सकारात्मक निर्णय लेगी।

