Home » Jharkhand Teacher Recruitment : डिग्री एक जैसी, नंबर भी एक जैसे! जानिए क्यों विवादों में घिरीं प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की डिग्रियां

Jharkhand Teacher Recruitment : डिग्री एक जैसी, नंबर भी एक जैसे! जानिए क्यों विवादों में घिरीं प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की डिग्रियां

15 साल बाद PG, फिर 67-68% अंक! माध्यमिक आचार्य के 102 अभ्यर्थियों की डिग्रियों पर विभाग को संदेह; जांच की मांग

by Kanchan Kumar
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची: झारखंड के सरकारी स्कूलों में माध्यमिक आचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है। हाल ही में चुने गए 102 अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और डिग्रियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव को चिट्ठी लिखकर इन सभी अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की गहराई से जांच कराने की मांग की है।
​चौंकाने वाली बात यह है कि जिन अभ्यर्थियों की डिग्रियों पर संदेह जताया गया है, उन सभी ने राज्य के ही दो अलग-अलग प्राइवेट विश्वविद्यालयों से पोस्ट ग्रेजुएशन और बीएड की पढ़ाई पूरी की है।

कैसे घूम रही शक की सुई,समझिए पूरा खेल

​विभागीय स्तर पर जब चयनित उम्मीदवारों के कागजातों और मार्क्स का मिलान किया गया, तो एक अनोखा पैटर्न देखने को मिला। अलग-अलग विषयों से पढ़ाई करने के बावजूद अभ्यर्थियों के नंबर एक खास दायरे में ही सिमटे हुए हैं।
​मार्क्स में अजीब सी एकरूपता दिखी।

निजी विश्वविद्यालयों से पीजी करने वाले उम्मीदवारों में से लगभग 93 अभ्यर्थियों के अंक 65% से 70% के बीच ही हैं।
​खोरठा विषय: 9 सफल उम्मीदवारों में से 6 को बिल्कुल एक जैसा 67% से 68% स्कोर मिला है।
​राजनीति शास्त्र: 14 में से 9 सफल अभ्यर्थियों के नंबर 67% से 68% के बीच अटके हैं।
​गृह विज्ञान: 13 में से 7 अभ्यर्थियों के अंक 66% से 67% के दायरे में ही हैं।

​15 साल का लंबा गैप, फिर भी एक जैसे नंबर

कई अभ्यर्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड देखकर विभाग भी हैरान है। स्नातक में जिन छात्रों को 47% से 54% के बीच अंक मिले थे, उन्होंने करीब 15 से 18 साल के लंबे ब्रेक के बाद अचानक वर्ष 2022-24 के दौरान पीजी किया और सबने 67% से 68% तक अंक हासिल कर लिए। उदाहरण के तौर पर, एक अभ्यर्थी को 2014 में ग्रेजुएशन में 47.81% मिले थे, लेकिन 2022-24 के सत्र में अचानक उसका स्कोर 67.19% हो गया।

​ग्रेजुएशन और पीजी के बीच बड़ा अंतर

जांच में सामने आया कि 11 अभ्यर्थियों ने ग्रेजुएशन पूरा करने के 10 साल या उससे अधिक समय बाद पीजी की डिग्री ली। वहीं, 20 से ज्यादा अभ्यर्थी ऐसे हैं जिनके ग्रेजुएशन और पीजी के बीच 8 से 9 सालों का अंतर रहा है।

माध्यमिक आचार्य नियुक्ति की प्रक्रिया साल 2025 में शुरू हुई थी। रिकॉर्ड बताते हैं कि 24 से अधिक उम्मीदवारों ने बहाली का विज्ञापन निकलने या प्रक्रिया शुरू होने वाले साल में ही अपनी पीजी परीक्षा पास की और डिग्री हासिल कर ली।

877 में से 244 अभ्यर्थी प्राइवेट यूनिवर्सिटी से पढ़े

​झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से माध्यमिक आचार्य पद के लिए कुल 877 उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश की गई है। इनमें से 244 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने प्राइवेट यूनिवर्सिटी से पीजी और बीएड किया है। फिलहाल विभाग ने उन 102 अभ्यर्थियों की फाइल अलग कर दी है जिनकी डिग्रियां राज्य के ही दो निजी विश्वविद्यालयों से जारी हुई हैं। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इन अभ्यर्थियों के भविष्य का फैसला हो सकेगा।

Read Also: Jharkhand News: झारखंड के 143 युवाओं को मिला सरकारी नौकरी का तोहफा,रोजगार मेले के मंच से गूंजे पीएम मोदी के बोल

 

 

Related Articles

Leave a Comment