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West Singhbhum Success Story : सरकारी योजना से बदली सरिता की तकदीर, उद्यमी बन अन्य महिलाओं को भी दिया रोजगार

पत्तल-दोना उद्योग से बनीं आत्मनिर्भर, सरकारी सहयोग, तकनीकी प्रशिक्षण और अपने अथक परिश्रम के बल पर पेश की स्वरोजगार की एक नई मिसाल।

by Rajeshwar Pandey
West Singhbhum Women Entrepreneurship
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चाईबासा : सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ जब सही हकदार तक पहुंचता है, तो बदलाव की एक नई कहानी लिखी जाती है। ऐसा ही एक उदाहरण पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड अंतर्गत पाथरबासा गांव में देखने को मिला है, जहां की निवासी सरिता नायक ने सरकारी सहयोग, तकनीकी प्रशिक्षण और अपने अथक परिश्रम के बल पर स्वरोजगार की एक नई मिसाल पेश की है। आज वे न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं।

मजदूरी से आत्मनिर्भरता तक का सफर

कुछ वर्ष पूर्व तक सरिता नायक का परिवार पूरी तरह से दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर था। आय अनिश्चित होने के कारण बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू खर्चों का प्रबंधन करना बेहद कठिन था। भविष्य को लेकर परिवार में हमेशा असुरक्षा की भावना बनी रहती थी। इस आर्थिक तंगी के बीच भी सरिता ने हार नहीं मानी और कुछ नया करने का संकल्प बनाए रखा।

सरकारी योजनाओं का मिला साथ

सरिता की जिंदगी में यू-टर्न तब आया जब वन विभाग और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की अभिसरण योजना के तहत उन्हें निःशुल्क पत्तल-दोना निर्माण मशीन उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही उन्हें मशीन संचालन और उत्पादन प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) द्वारा आधुनिक तरीके से मशीन चलाने और गुणवत्ता नियंत्रण की बारीकियां सिखाई गईं। स्वयं सहायता समूह (SHG) और स्थानीय पंचायत के सहयोग से अन्य स्वरोजगार उन्मुख कार्यक्रमों से जोड़ा गया, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।

स्थानीय संसाधनों से खड़ा किया उद्यम

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सरिता ने अपने घर से ही पत्तल और दोना निर्माण का कार्य शुरू किया। कच्चे माल के रूप में आवश्यक पत्ते गांव और आसपास के जंगलों से ही आसानी से मिल जाते थे, जिससे लागत बेहद कम रही। शुरुआत में परिवार के सहयोग से छोटे स्तर पर काम शुरू कर स्थानीय बाजारों, किराना दुकानों और शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में आपूर्ति की जाने लगी। बेहतर गुणवत्ता के कारण धीरे-धीरे बाजार में उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और नियमित ऑर्डर मिलने शुरू हो गए।

अन्य महिलाओं को जोड़कर पेश की महिला सशक्तिकरण की मिसाल

व्यवसाय बढ़ने पर सरिता ने सफलता का लाभ गांव की अन्य महिलाओं तक भी पहुंचाया। उन्होंने गांव की 2-3 महिलाओं को मशीन संचालन, उत्पादन और पैकेजिंग का प्रशिक्षण देकर अपने साथ जोड़ा। इससे जहां एक तरफ उनके उद्यम की उत्पादन क्षमता बढ़ी, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का जरिया भी बना।

आर्थिक स्थिति सुदृढ़, समाज में बढ़ा मान

आज सरिता नायक की मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं देने में सक्षम हैं। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ समाज में एक सफल महिला उद्यमी के रूप में उनका सम्मान भी बढ़ा है।

सरिता का अपना विचार

सरिता नायक की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो और सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। उनकी यह कहानी न केवल स्थानीय संसाधनों पर आधारित पर्यावरण-अनुकूल आजीविका को बढ़ावा देती है, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।

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