
स्पेशल डेस्क, नई दिल्ली : केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो गई है। गुरुवार को चर्चा का आखिरी दिन है। माना जा रहा है कि आज देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चर्चा का जवाब देंगे। विपक्ष का दावा है कि वह चर्चा के बहाने मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बोलने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। यह तो पहले से साफ है कि लोकसभा में नरेंद्र मोदी सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है लेकिन विपक्ष अपनी तरफ से सरकार पर दबाव बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता। इन सबके बीच इस पूरी चर्चा में सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में सांसद डॉ निशिकांत दुबे बने हुए हैं। कौन हैं डॉ. निशिकांत दुबे। लाखों लोग यह सवाल का उत्तर जानना चाहते हैं। हम आपको विस्तार से बताते हैं डॉ निशिकांत दुबे के बारे में।
कौन हैं डॉ. निशिकांत दुबे
डॉ निशिकांत दुबे झारखंड के गोड्डा लोकसभा क्षेत्र भाजपा के निर्वाचित सांसद हैं। वह लगातार दूसरी बार अपनी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। बुधवार को शुरू हुई अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान वह भारतीय जनता पार्टी की तरफ संसद में बोलने के लिए खड़े हुए थे। उन्होंने अपने जवाब में न सिर्फ विपक्षी दलों को निशाने पर लिया बल्कि कांग्रेस पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी पर सीधे हमला बोल दिया। उन्होंने अपने संबोधन ने कहा कि” मोदी जी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का दो ही मकसद हैं, बेटे को सेट करना है, दामाद को भेंट करना है। इस तरह उन्होंने राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा पर करारा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने संसद में रॉबर्ट वाड्रा का नाम लिए बिना दामाद शब्द का उल्लेख किया। उन पर अलग-अलग जगहों पर बेनामी संपत्ति होने संबंधी आरोपियों के दावे का उल्लेख किया। नेशनल हेराल्ड केस में ₹100000 देकर 5000 करोड़ की संपत्ति हासिल करने जैसे आरोप लगाए।
मोदी जी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का दो ही मक़सद है,बेटे यानि राहुल गांधी को सेट करना व दामाद को भेंट करना pic.twitter.com/DjUCeOUzCq
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) August 8, 2023
75 साल बनाम मोदी के काम का दिया ब्योरा
सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने अपने संबोधन में 75 साल बनाम मोदी के काम का उल्लेख किया। अपने निजी अनुभव से लेकर अपने संसदीय क्षेत्र तक की पीड़ा और मौजूदा हालात के बारे में डॉ निशिकांत दुबे ने संसद में विस्तृत जानकारी दी। बताया कि एक ऐसा समय था, जब उनकी अपनी बहन की मौत इलाज के अभाव में हो गई थी। उनके क्षेत्र में इलाज की कोई व्यवस्था नहीं थी। लोगों को नदी पार कर जाना पड़ता था। नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद आज उनके संसदीय क्षेत्र में एम्स और दो मेडिकल कॉलेज की सुविधा हो गई हैं। पहली बार रेलवे की सुविधा पहुंची है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में रेल देखने के लिए 5 लाख लोग जमा हुए थे। इसके अलावा उन्होंने देवघर एयरपोर्ट, साहिबगंज में गंगा नदी पर बना रहे पुल और पोर्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने अपने संबोधन में अलग-अलग पार्टियों के नेताओं पर कांग्रेस के शासनकाल में हुई कार्रवाई का उल्लेख किया। उन्होंने अपने भाषण के अंत में अविश्वास प्रस्ताव की तुलना महाभारत में द्रौपदी के चीर हरण से की। कहा कि मौजूदा समय में नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों का चीर हरण करने की कोशिश हो रही है। ऐसा करने वाले अगले चुनाव में जनता से चुनकर फिर संसद तक नहीं आ पायेंगे। दावा किया कि उनकी पार्टी 400 से अधिक सीटें लेकर आएगी।
झारखंड में ED की छापेमारी की सूचना मीडिया से पहले देने के लिए चर्चित रहे हैं डॉ. निशिकांत दुबे
डॉ निशिकांत दुबे झारखंड के सबसे चर्चित सांसदों में से एक हैं। वह झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से भ्रष्टाचार के अलग-अलग मामलों में की जाने वाली छापेमारी की सूचना अपने टि्वटर हैंडल के जरिए विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म से कहीं पहले और सटीक देने के लिए जाने जाते रहे हैं। कई बार उनकी इन सूचनाओं पर उनके विरोधी सवाल भी खड़ा करते रहे हैं।
हेमंत सोरेन सरकार को हमेशा से रखा है निशाने पर
डॉ. निशिकांत दुबे ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को लगातार अपने निशाने पर रखा है। वह मौजूदा सरकार पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं। भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों में उन्होंने अलग-अलग लोगों पर आरोप लगाए हैं। इन आरोपियों में से कई वर्तमान में जेल में बंद हैं।
देवघर के डीसी रहे IAS मंजूनाथ भजंत्री से चला लंबा विवाद
डॉ निशिकांत दुबे की पत्नी से जुड़े जमीन के मामले में कार्रवाई को लेकर देवघर के निवर्तमान डीसी IAS मंजूनाथ भजंत्री के साथ उनका लंबा विवाद चला। देवघर एयरपोर्ट में प्रवेश करने को लेकर भी दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ केस दर्ज कराया था। मंजूनाथ भजंत्री का तबादला पूर्वी सिंहभूम जिले में होने के बाद मामला ठंडा पड़ गया है। हालांकि निशिकांत दुबे अपना विरोधियों को कभी शांत बैठने का मौका नहीं देते।

