
Ranchi : झारखंड की राजनीति के बीच रविवार को राजधानी रांची में आध्यात्मिकता की भी झलक देखने को मिली। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने चुटिया स्थित ऐतिहासिक योगदा सत्संग आश्रम का दौरा किया। इस दौरान दोनों ने आश्रम के वरिष्ठ संतों से मुलाकात की और परिसर में मौजूद परमहंस योगानंद से जुड़ी स्मृतियों और ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन किया।
आश्रम पहुंचने पर मुख्यमंत्री दंपति का आत्मीय स्वागत किया गया। उन्होंने स्वामी ईश्वरानंद और स्वामी निर्मलानंद से शिष्टाचार मुलाकात की। संतों ने आश्रम में संचालित आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक सेवा और शिक्षा से जुड़े कार्यों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी।
परमहंस योगानंद के कक्ष में देखीं ऐतिहासिक स्मृतियां
दौरे के दौरान हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने परमहंस योगानंद से जुड़ी कई महत्वपूर्ण स्मृतियों को देखा। उन्होंने उस ऐतिहासिक कक्ष का भी अवलोकन किया, जहां योगानंद जी रहा करते थे। कक्ष में उनकी चारपाई, चरण-चिह्न, वस्त्र, छाता और गुलाब का फूल जैसी स्मृतियां आज भी सुरक्षित रखी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने फोटो और पुस्तक गैलरी का भी भ्रमण किया। यहां परमहंस योगानंद के जीवन से जुड़े दुर्लभ चित्र, उनकी प्रसिद्ध पुस्तक योगी कथामृत, शिष्यों की पुस्तकें और उनके सम्मान में जारी डाक टिकटों को देखा।
इसके अलावा मुख्यमंत्री और कल्पना सोरेन ने आश्रम के ध्यान मंदिर, उद्यान, स्मृति मंदिर और ऐतिहासिक लीची वेदी का भी भ्रमण किया। मान्यता है कि योगानंद जी इस स्थान पर बैठकर लंबे समय तक ध्यान साधना किया करते थे।
1917 में हुई थी योगदा सत्संग सोसाइटी की स्थापना
रांची का योगदा सत्संग आश्रम आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया की स्थापना 1917 में परमहंस योगानंद ने की थी। रांची का आश्रम इस परंपरा के प्रमुख केंद्रों में शामिल है।
परमहंस योगानंद ने भारतीय योग और क्रिया योग की शिक्षाओं को भारत के साथ पश्चिमी देशों तक पहुंचाया। उनकी पुस्तक ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी यानी योगी कथामृत दुनिया भर में चर्चित आध्यात्मिक ग्रंथों में शामिल है।
1918 में रांची में शुरू किया था आवासीय विद्यालय
योगानंद के रांची प्रवास का शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्ष 1918 में उन्होंने बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय की शुरुआत की थी, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों पर भी जोर दिया जाता था। आश्रम का पुराना मुख्य भवन आज भी उनकी स्मृतियों को संजोए हुए है।
आश्रम परिसर का ध्यान मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण है। यहां बड़ी संख्या में साधक सामूहिक ध्यान करते हैं। स्मृति मंदिर और लीची वेदी भी आश्रम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
आज भी क्रिया योग और ध्यान का प्रमुख केंद्र
योगदा सत्संग आश्रम आज भी क्रिया योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना के क्षेत्र में सक्रिय है। यहां नियमित सत्संग, सामूहिक ध्यान और योगदा सत्संग पाठमाला के माध्यम से लोगों को मानसिक शांति और संतुलित जीवन के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के इस दौरे ने रांची के इस ऐतिहासिक आश्रम को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। योगदा आश्रम झारखंड की आध्यात्मिक विरासत में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और देश-विदेश से साधक यहां आध्यात्मिक शांति की तलाश में पहुंचते हैं।

