दुमका : Jharkhand State Minority Commission : झारखंड सरकार राज्य में अल्पसंख्यकों के विकास को लेकर गंभीर है और अल्पसंख्यक समुदाय में अशिक्षा से लड़ाई एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने है। राज्य के किसी भी नागरिक के अधिकार का हनन नहीं होने दिया जाएगा। राज्य अल्पसंख्यक आयोग 27 जून से राज्य के एक-एक जिलों का भ्रमण कर अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा कर रही है। उक्त बातें झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने बुधवार को दुमका पहुंचने पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं।
Jharkhand State Minority Commission : नियुक्ति हुई उर्दू के लिए, पढ़ा रहे संस्कृत
अल्पसंख्यकों के बीच अशिक्षा से निपटने को बड़ी चुनौती बताते हुए हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि कई जिलों की समीक्षा में अजीब तरह के मसले उभर कर सामने आए हैं। समीक्षा के दौरान यह भी मामला उजागर हुआ है कि जो उर्दू नहीं जानते हैं उन्हें उर्दू का शिक्षक नियुक्त कर दिया गया है। कई ऐसे स्कूल हैं जहां उर्दू शिक्षकों को पदास्थापित कर दिया गया है लेकिन एक भी छात्र उर्दू नहीं पढ़ता है। मजबूरन ऐसे शिक्षक संस्कृत पढ़ा रहे हैं। सभी जिलों में योजनाओं की समीक्षा की जा रही है। यह कार्य पूरा होने के बाद आयोग अपनी अनुशंसा के साथ राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी।
Jharkhand State Minority Commission : मदरसों की हालत अच्छी नहीं
झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि अबतक जो समीक्षा की गई है उसमें यह बात भी सामने आई है कि मदरसों की स्थिति ठीक नहीं है। चंदे के पैसे से मदरसों का संचालन किसी तरह से किया जा रहा है। देवघर जिले को ही लें तो वहां 280 मदरसे हैं लेकिन मात्र तीन को ही सरकारी अनुदान मिल रहा है। दुमका जिले में 17 निबंधित मदरसों में मात्र पांच को ही अनुदान मिल रहा है।
Jharkhand State Minority Commission : नफरत फैला रहे कुछ राजनीतिक दल
एक सवाल के जवाब में हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल नफरत का वायरस लोगों के दिमाग में लगातार भर रहे हैं। यह अलग बात है कि उन्हें अपने प्रयोजन में सफलता नहीं मिल रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे जैसे लोग मोहब्बत फैलाकर इस नफरत के वायरस को रोक रहे हैं।
Jharkhand State Minority Commission : बांग्लादेशी घुसपैठ से आयोग का लेनादेना नहीं
संताल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले का आयोग से कोई सीधा सरोकार नहीं है। बांग्लादेशी घुसपैठ के मामलों को राज्य की सरकार गंभीरता से देख रही है। इस मामले में किसी की हकमारी नहीं होने दी जाएगी। राज्य सरकार तमाम विपरीत परिस्थितियों में जनहित में काम कर रही है। आक्रोशित भीड़ द्वारा हत्या करने जैसे मामलों को लेकर भी सरकार सख्त है। जहां तक अल्पसंख्यक आयोग की बात है तो ऐसी घटनाओं पर तत्काल पहल कर पीड़ित पक्षों को न्याय दिलाने की कोशिश की जाती है।
Jharkhand State Minority Commission : हेमंत के खिलाफ भाजपा ने रचा षडयंत्र, अदालत से मिला न्याय
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भाजपा ने षडयंत्र रचा था। जानबूझकर उन्हें पांच माह तक कानूनी गिरफ्त में रखा। आखिर अदालत ने न्याय मिला और उन्हें रिहा किया गया। राज्य सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने के आरोपों को एक सिरे से खारिज करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि हेमंत सरकार धर्म व जाति के नाम पर राजनीति करने के बजाए जनहित में काम करने पर भरोसा करती है। यह राज्य सरकार की लोकप्रियता का एक कारण भी है।

