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अदाणी मुद्दे पर राज्यसभा में हंगामा, कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित

by Anand Mishra
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नई दिल्ली : अदाणी समूह के खिलाफ आरोपों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने गुरुवार को राज्यसभा में जोरदार हंगामा किया। इस कारण सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अदाणी समूह के कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं पर चर्चा के लिए दबाव बनाया।

नियम 267 के तहत 16 नोटिस खारिज

सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सभापति जगदीप धनखड़ ने जानकारी दी कि अदाणी, मणिपुर हिंसा और संभल हिंसा से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए उन्हें नियम 267 के तहत कुल 16 नोटिस मिले हैं। लेकिन उन्होंने सभी नोटिस को अस्वीकार कर दिया।
सभापति ने कहा, “सदस्य इन मुद्दों को अन्य प्रावधानों के तहत उठा सकते हैं, लेकिन नियम 267 के तहत इनका स्वीकार करना उचित नहीं है।”

विपक्षी दलों का जोरदार विरोध

कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, रणदीप सुरजेवाला और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने अदाणी समूह से जुड़े आरोपों पर चर्चा की मांग की। इसी तरह, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने संभल हिंसा और मणिपुर के हालात पर चर्चा के लिए नोटिस दिए थे। प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया, “यह देश की अर्थव्यवस्था और 2300 करोड़ रुपये से जुड़ा गंभीर मामला है। सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।”

संसदीय अवरोध लोकतंत्र के लिए हानिकारक

सभापति धनखड़ ने विपक्षी सदस्यों से कहा कि संसद का मंच केवल बहस का स्थान नहीं है, बल्कि यहां से राष्ट्रीय भावना की गूंज होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “संसदीय अवरोध कोई समाधान नहीं है, यह एक रोग है। यह हमारी संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करता है और लोकतंत्र को अप्रासंगिक बना देता है।”

धनखड़ ने आगे कहा कि सदन को जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। “जब हम इस तरह के आचरण में संलग्न होते हैं, तो हम अपने संवैधानिक कर्तव्यों से भटक जाते हैं,” उन्होंने कहा।

विपक्ष के रवैये पर नाराजगी

सभापति ने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बुधवार को संविधान अपनाए जाने के 75 वर्ष पूरे होने का अवसर था, लेकिन सदन रचनात्मक संवाद देने में विफल रहा। उन्होंने कहा, “हमें इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रवाद और विकसित भारत की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करनी चाहिए थी, लेकिन हम असफल रहे।”

सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

दोपहर 12 बजे कार्यवाही शुरू होने के बाद भी विपक्ष ने अपनी मांगों पर जोर दिया। इस दौरान सभापति ने प्रश्नकाल सुचारू रूप से चलाने की अपील की, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण दोपहर 12:07 बजे सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

क्या है नियम 267?

राज्यसभा का नियम 267 सदस्यों को यह अनुमति देता है कि वे सभापति की मंजूरी से सदन के पूर्व निर्धारित एजेंडे को निलंबित कर किसी राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर चर्चा कर सकें। अगर किसी विषय को नियम 267 के तहत स्वीकार किया जाता है, तो यह दर्शाता है कि वह विषय उस दिन का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।

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